World War in Hindi

अभी तक सिर्फ २ विश्व युद्ध हुए है, प्रथम 28 जुलाई 1914 से 11 नवंबर 1918 तक चला जो की युरोप, अफ़्रीका और मध्य पूर्व (आंशिक रूप में चीन और प्रशान्त द्वीप समूह) में लड़ा गया था। जबकि दूसरा विश्व युद्ध 1 सितंबर 1939 – 2 सितम्बर 1945 (6 वर्ष और 1 दिन) चला इससमे ७० देशों ने भाग लिया था , और यह युद्ध यूरोप, प्रशांत, अटलांटिक, दक्षिण-पूर्व एशिया, चीन, मध्य पूर्व, भूमध्यसागर, उत्तरी अफ्रीका और हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका, संक्षेप में उत्तर और दक्षिण अमेरिका में लड़ा गया था।

प्रथम विश्व युद्ध के कारण

मानव सभ्यता में हर युग में युद्ध का कारन सिर्फ एक ही रहा है, वर्चस्व, फिर वो चाहे धन का हो पद का हो या फिर व्यापर के लिए हो, २०वी सदी का प्रारंभिक समय पुरे विश्व में औधोगिक क्रांति का दौर था, नयी नयी मशीने बन रही थी जिनके लिए ज्यादा शायद बहुत ज्यादा कच्चा माल सस्ते दामों में चाहिए था, क्युकी मशीनों से काम आसान हो रहा था, रोजगार कम हो रहे थे, जरूरते बढ़ रही थी, भवन निर्माण और अन्य फ़ैक्टरिओ के कारन कच्चे माल के लिए भूमि कम पड़ रही थी, इसलिए हर समृद्ध देश विशेषकर यूरोप के देश औपनिवेशवाद को बढ़ावा दे रहे थे, एक उपनिवेश से दूसरे देश को या तो भगा रहे थे या दें कर रहे थे।

वर्चस्व की भावना इस तरह बढ़ती जा रही थी की हर देश दूसरे देश के साथ लड़ने को आमादा था, बस किसी तात्कालिक कारन हो खोज रहा था, और इसका तात्कालिक कारन बना जो की बारूद में पलीते के तरह काम कर गया।

ऑस्ट्रिया के सिंहासन के उत्तराधिकारी आर्चड्युक फर्डिनेंड और उनकी पत्नी का वध इस युद्ध का तात्कालिक कारण था, जब दोनों दंपत्ति धूमने के लिए सेराजेवो गए तो कुछ लोगो ने जो की सर्बिआ विद्रोहिओ का अम्युदय था उसने 28 जून 1914 इस दंपत्ति की हत्या कर दी, और इस कारन एक माह के बाद ऑस्ट्रिया ने सर्बिया के विरुद्ध युद्ध घोषित किया।

इसके बाद से शुरू होता है की कौन सा देश किसकी साहित्य karega, कौन किससे लड़ेगा, रूस, फ़्रांस और ब्रिटेन ने सर्बिया की सहायता की और जर्मनी ने आस्ट्रिया की। अगस्त में जापान, ब्रिटेन आदि की ओर से और कुछ समय बाद उस्मानिया, जर्मनी की ओर से, युद्ध में शामिल हुए।

प्रथम विश्व युद्ध के परिणाम

यह युद्ध लगभग ५२ महीने चला, विश्व युद्ध ख़त्म होते-होते चार बड़े साम्राज्य रूस, जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी (हैप्सबर्ग) और उस्मानिया ढह गए। यूरोप की सीमाएँ फिर से निर्धारित हुई और अमेरिका निश्चित तौर पर एक ‘महाशक्ति ‘ बन कर उभरा।

इस युद्ध के दौरान अंदाज़न एक करोड़ लोगों की जान गई और इससे दोगुने घायल हो गए। इसके अलावा बीमारियों और कुपोषण जैसी घटनाओं से भी लाखों लोग मरे।

दूसरे विश्व युद्ध के प्रमुख कारण

अगर हम कहे की दूसरे विश्व युद्ध का आधार प्रथम युद्ध था तो ये कहना एकदम गलत नहीं होगा, क्युकी पहले विश्वयुद्ध में जीते हुए देशो का व्यव्हार हारे हुए देशो के नागरिको के साथ बहुत ही बर्बरता पूर्ण था, प्रथम विश्वयुद्ध के विजसता जैसे फ्रांस, बेल्जियम, इटली, ग्रीस और रोमानिया इत्यादि देशो ने बहुत से विघटित हुए राष्ट्रों के भूभाग को प्राप्त कर किये, केन्द्रीय शक्तियों जैसे ऑस्ट्रिया-हंगरी, जर्मनी, बुल्गारिया, रूसी एवं ओटोमन साम्राज्य का विघटन और काफी कुछ हद तक पतन हो गया था।

द्व्तीय विश्वयुद्ध के लिए सबसे अधिक अगर किसी को जिम्मेदार माना जाता है तो वो है अडोल्फ हिटलर को, लेकिन वास्तव में उसे जितना क्रूर और सनकी तत्कालीन ब्रिटिश और अमेरिकी लेखकों ने साबित किया था शायद वो उतना नहीं रहा होगा अन्यथा भारत के महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री सुभास चंद्र बोस उससे शायद कभी हाथ न मिलाते

वास्तव में प्रथम विश्वयुद्ध के विजेता राष्ट्रों की संकुचित नीति के कारण ही स्वाभिमानी जर्मन राष्ट्र को हिटलर के नेतृत्व में आक्रमक नीति अपनानी पड़ी, हिटलर जर्मन सेना में में था जब १९१८ में वह घायल होकर अस्पताल में भर्ती हुआ और उसकी वीरता एवं साहस के लिए आर्यन क्रॉस जैसे पदक प्राप्त हुए थे, वह स्वयं को आर्य अर्थात श्रेष्ठ मानता था और साथ ही यह भी मानता था की आर्य ही पूरी दुनिआ पर राज्या करने के लिए उत्तम लोग है।

प्रथम विश्वयुद्ध के बाद कुछ राज्यों ने एक दूसरे के साथ गुप्त संधिया की थी, जिनके आधार पर वे एक दूसरे पर हमला नहीं करेंगे, और किसी एक पर अन्य राज्य द्वारा हमला दूसरे राज्य पर भी माना जायेगा, और हिटलर के नेतृत्व में जर्मनी के सेनिको का मनोबल बहुत बढ़ रहा था और इसका परिणाम ये हुआ की जर्मनी सेनिको ने जो की हिटलर ने नेतृत्त्व में नाजी कहे जाते थे, ने ०१ सितम्बर १९३९ को पोलेंड पर हमला कर दिया, लेकिन पोलेंड के मित्र राष्ट्र फ़्रांस ने जर्मनी के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी।

फ़्रांस जैसी शक्ति का इस दूसरे विश्व युद्ध में शामिल होते ही इग्लेंड एवं अन्य देश जो ब्रिटिश के अधीन थी इसमें स्वतः ही शामिल हो गए थे, इसके बाद जापान, इटली और अन्य देश भी शामिल होते रहे।

कहा जाता है की इस दूसरे विश्व युद्ध में जापान ने सबसे पहले प्रशान्त महासागर में युरोपीय देशों के आधिपत्य वाले क्षेत्रों तथा संयुक्त राज्य अमेरीका के पर्ल हार्बर पर हमला बोल दिया और जल्द ही पश्चिमी प्रशान्त पर क़ब्ज़ा बना लिया।

कई स्थानों पर जर्मनी की हार, जापान की हार इटली की हार से होते हुए विश्व युद्ध अपनी आखरी स्तर पर था तभी अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा पर ६ अगस्त और नागासाकी पर ९ अगस्त १९४५ को परमाणु बम्ब गिरा कर समस्त मानवजाति को शर्मशार कर दिया था, एक संधि जिसका नाम कुबेक संधि उसके अनुसार इस बम्ब को गिराने में ब्रिटेन की भी सहमति थी।

दूसरे विश्व युद्ध के परिणाम

दूसरे विश्वयुद्ध के परिणाम बहुत ही बुरे और भायवह थे, जापान के हिरोशिम और नागासाकी जैसे दो नगरों पर परमाणु बम्ब का गिरना और उसके रेडिएशन का बाद के कई वर्षो तक नवजात शिशुओं पर असर दिखना सबसे बुरा अंत था, राजनैतिक रूप से नाजी जर्मनी का पतन, जापानी और इतालवी साम्राज्यों का पतन, राष्ट्र संघ का विघटन, संयुक्त राष्ट्र का निर्माण, महाशक्तियों के रूप में संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ का उत्थान और सबसे विशेष हर राष्ट्र के दूर के प्रति शीत युद्ध की शुरुआत।

यही था दूसरे विश्वयुद्ध का वास्तविक अंत।

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