Where is Amer Fort Jaipur Rajasthan India

Amer Fort, a world famous monumet is situated in Jaipur city of Rajasthan, India, Lat Long of Amer Fort is 26.9859°N 75.8507°E and address of Amer Fort is Devisinghpura, Amer, Jaipur, Rajasthan 302001, Amer Fort is only 25 km North from Jaipur airport, Amer Fort was built by Raja Man Singh a Rajpur ruler of Jaipur.

Facts about Amer Fort

Name Amer Fort
City Jaipur,
Address Devisinghpura, Amer, Jaipur, Rajasthan 302001
Country India
Continent Aisa
Came in existence 1592
Built by Man Singh
Area covered in KM 4 square kilometres
Height 8 foot
Time to visit 8AM-5:30PM
Ticket time 8AM-5:30PM
When to visit
Unesco heritage 1983
Ref No of UNESCO 2872
Coordinate 26.9859°N 75.8507°E
Per year visitors 900 visitors per day
Near by Airport Jaipur airport
Near by River Tourism · Rivers

Where is Amer Fort Located in Rajasthan , India

Location of Amer Fort, Located in Rajasthan India . on Google Map

History of Amer Fort in Hindi

आमेर के किले का इतिहास बहुत ही भव्य और प्राचीन है, इस किले के निर्माण में राजपूत राजाओ की दो पीढ़ीओ का महत्वपूर योगदान है, आमेर के किले का निर्माण सबसे पहले १५१२ में आमेर के तत्कालीन राजा मानसिंघ प्रथम ने शुरू किया था और उसके बाद इस किले में कई सुधर और विस्तार होते रहे जिसमे सबसे ज्यादा योगदान सवाई राजा जयसिंह का योगदान रहा है, और आमेर के लिए का वर्तमान स्वरूप वो है १७१७ में बनकर संपन्न हुआ था।

आमेर के किले को बनाये जाने का इतिहास

आमेर के राजा भारमल ने जब अपनी बेटी और कुछ इतिहासकारो के अनुसार दासी की पुत्री की शादी जब अकबर से कर दी थी तो तत्कालीन कुछ राजपूत राजाओ को आमेर के लोगो से घृणा हो गयी थी इसलिए राजपूत राजाओ से असुरक्षा के कारण मान सिंह ने जयपुर से ११ किलोमीटर दूर एक पहाड़ी पर किले का निर्माण करवाया जिसे आमेर का किला कहा जाता है, क्युकी उस पहाड़ी और उसके आस पास के क्षेत्र को आमेर कहा जाता है

आमेर के किले की कलात्मकता का इतिहास

कुछ इतिहासकारो का मानना है की भारमल का अपनी पुत्री की अकबर से शादी करना एक राजनैतिक दूरदर्शिता थी, क्युकी वो कई वर्षो से मेवाड़ राजाओ का मुगलो से युद्ध देख रहे थी और जन धन हानी भी देख रहे थे साथ ही ये भी देख रहे थे की पुरे राजपूताने में मेवाड़ के राजाओ का कोई भी खुलकर साथ नहीं दे रहा है, इसलिए उन्होंने अकबर से रिश्ता जोड़ना ही उचित समझा और इस प्रकार से अपनी प्रजा और राज्य की रक्षा की, परन्तु उनका अंदर से हृदय हिन्दू ही था इसलिए पुरे किले में कही भी मुगल शैली की झलका नहीं है वल्कि शुद्ध रूप से हिन्दू तत्वों की अपनी कलात्मक शैली के लिए जाना जाता है, पूरा किला दुर्गम पहाडिओ पर टेड़े मेढे रिश्ते पर बना हुआ है, शायद ये इसलिए भी था की उनको मुगलो पर भरोषा भी नहीं था. न जाने कब हमला कर दे इसलिए भी इसे इतना दुर्गम बनाया था, यहाँ पर कई भव्य मंदिर भी है।

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