Trimbakeshwar Temple Nashik Maharashtra, Trimbakeshwar Mandir History in Hindi

Trimbakeshwar Temple Nashik Maharashtra

Trimbakeshwar Temple History in Hindi

त्रिंबकेश्वर या त्र्यंबकेश्वर में बना हुआ भगवान शिव का विशाल त्र्यंबकेश्‍वर मंदिर काले पत्‍थरों से बना है, महर्षि गौतम जी पर भगवान शिव की कृपा के कारन स्वतः प्रकट हुआ मंदिर है, एक बार महर्षि पर अन्य लोगो ने गौ हत्या का मिथ्या आरोप लगाकर छल किया जिससे स्वयं को शुद्ध करने के लिए महात्मा अगस्त ने घनघोर तप किया और भगवान के दर्शन होने पर उनसे इस धरा पर गंगा माता के अवतरण की प्रार्थना की, जिस पर भगवान शिव ने तथास्तु भी कह दिया .

किन्तु फिर माता गंगा की प्रार्थना पर भगवान ने स्वयं भी यहाँ पर ज्योतिर्लिंग स्वरूप में निवास करना स्वीकार किया, यह ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के बारह कल्याणकारी शिवलिंगों में से एक है।
मंदिर के अंदर एक छोटे से गड्डे में तीन छोटे-छोटे लिंग है, ब्रह्मा, विष्णु और शिव- इन तीनों देवों के प्रतीक माने जाते हैं। शिवपुराण के ब्रह्मगिरि पर्वत के ऊपर जाने के लिये चौड़ी-चौड़ी सात सौ सीढ़ियाँ बनी हुई हैं। इन सीढ़ियों पर चढ़ने के बाद ‘रामकुण्ड’ और ‘लष्मणकुण्ड’ मिलते हैं और शिखर के ऊपर पहुँचने पर गोमुख से निकलती हुई भगवती गोदावरी के दर्शन होते हैं।

Facts about Trimbakeshwar Temple Nashik

Nameत्रयम्बकेश्वर मंदिर(Trimbakeshwar Temple
LocationTrimbak
City Trimbakeshwar
DistrictNashik
StateMaharashtra
CountryIndia
ContinentAsia
Built in500 A.D
Built by (Re-Built)Balaji Baji Rao in 1755
Coordindates19°55′56″N 73°31′51″E
ArchitectureIndus Aryashalai
HeightAbout 1000 metres from the Sea Level
Nearest Railway StationNashik
Nearest AirportOzar Airport, Nashik

त्र्यंबकेश्वर मंदिर कहाँ पर स्थित है

त्र्यंबकेश्वर मंदिर महाराष्ट्र के नाशिक जिले में स्थित है, यह नाशिक शहर से 18 किलोमीटर दूर ब्रह्मगिरी पर्वत पर समुद्री सतह से 3000 फीट की ऊंचाई पर बना हुआ है।

Where is Trimbakeshwar Temple Located in Nashik Maharashtra India

Location Map of Trimbakeshwar Temple in Nashik Maharashtra India on Google Map

त्रिंबकेश्वर जाने के मार्ग

त्र्यंबकेश्वर मंदिर जाने के 2 अलग-अलग रास्ते है। नाशिक से त्रिंबकेश्वर केवल 18 किलोमीटर दूर है और इस रास्ते का निर्माण श्री काशीनाथ धाटे की सहायता से 871 AD में किया गया था।
दुसरे आसान रास्तो में इगतपुरी-त्रिंबकेश्वर का रास्ता है। लेकिन इस रास्ते से जाते समय हमें 28 किलोमीटर की लम्बी यात्रा करनी पड़ती है।

त्र्यंबकेश्वर मंदिर का निर्माण किसने करवाया था

जैसा की मान्यता है की यह एक स्वतः प्रकट भगवान शिव का मंदिर है तो इसका निर्माण किसने करवाया का उत्तर मिलना अति दुस्कर है, है समय समय पर इस मंदिर का विस्तार और पुनरूद्धार कई राजाओ ने करवाया है, कहा जाता है वर्तमान समय से ५०० वर्ष पहले सबसे पहले इस मंदिर के निमित्त कुछ कार्य किया गया था फिर मराठा साम्राज्य के तीसरे पेशवा बालासाहेब अर्थात नानासाहेब पेशवा ने करवाया था। इस मंदिर का जीर्णोद्धार सन 1755 में शुरू हुआ था, जिस काम का अंत बाद 1786 में संपन्न हुआ।

त्र्यंबकेश्वर मंदिर की विशेषता

त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग की सबसे अद्भुत और असाधारण बात तो यह है कि इसके तीन मुख(सर) हैं। एक भगवान ब्रहमा, एक भगवान विष्णु, और एक भगवान रुद्र। इस लिंग के चारों ओर एक रत्नजडित मुकुट रखा गया है जिसे त्रिदेव के मुखोटे के रुप में रखा गया है। कहा जाता है कि यह मुकुट पांडवों के समय से यहीं पर है। इस मुकुट में हीरा, पन्ना और कई बेशकीमती रत्न जुड़े हुए हैं। त्रयम्बकेश्वर मंदिर(Trimbakeshwar Temple) में इसको सिर्फ सोमवार के दिन 4 से 5 बजे तक दिखाया जाता है। इस मंदिर के पंचकोशी में कालसर्प शांती त्रिपिंडी विधि और नारायण नागबली आदि पूजा कराई जाती है।
त्रयम्बकेश्वर मंदिर(Trimbakeshwar Temple) का भव्य इमारत सिंधु आर्यशैली का अद्भुत नमूना है। इस मंदिर के भीतर एक गर्भगृह है, जिसमें प्रवेश करने के पश्चात शिवलिंग के सिर्फ आंख ही दिखाई देती है, लिंग नहीं।

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