Facts and History about Sanchi Stupa

The height of Sanchi stupa is 54 ft or we can say more than 12 meter, its diameter is 120 ft means 32 meter, its architecture style is Buddhist, it is secret place for the buddh’s followers, in year 1989 in the 13th session of UNESCO, UNESCO declared it cultural world heritage site of India

Who Built Sanchi Stupa

Sanchi Stupa was originally made by emperor Ashoka in the 3rd century before christ, he was most powerful emperor of Maurya Dynasty, when he converted into buddha darm from hindu dharm, he created this stupa in Sanchi, a good town in Raisen city of Madhya Pradesh in these days

Sanchi Stupa Facts

Name SanchiStupa
City Bhopal
Address Sanchi, Madhya Pradesh 464661
Country India
Continent Asia
Came in existence 300 BC
Built by Emperor Ashoka
Area covered in KM 46 km
Area covered in miles Na
Height around 54 feet.
Time to visit 6:30 am to 6:00 pm
When to visit November to February/March.
Unesco heritage 1989
Ref No of UNESCO 524
Coordinate 23.4873° N, 77.7418° E
Per year visitors 2500 years
Near by Airport Raja Bhoj airport
Near by River Betwa River

Sanchi Stupa History in Hindi

साँची का स्तूप मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के साँची नामक गांव में है, यह स्थल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से मात्र ४६ किलोमीटर उत्तर पूर्व में स्थित है, ये विश्व प्रसिद्द ईमारत बुद्ध धर्म के अनुयायियों का एक तीर्थ स्थल है, जिसे तीसरी शताब्दी में मौर्य वंश के प्रतापी सम्राट अशोक ने बनवाया था, पहले अशोक हिन्दू धर्म में आस्था रखते थे, परंतु कलिंग विजय के उपरांत उन्होंने नरसंघार से दुखी होकर बुद्ध धर्म अपना लिया, जिसकी दीक्षा उनके स्वयं के भतीजे ने दी थी, जिसे अशोक ने एक बार जीवन दान दिया था।

Facts about Sanchi Stupa in Hindi

यह एक अर्द्धचरनुमा ईमारत है, इसमें ही अशोक ने अपना धर्म चक्र सबसे ऊपर स्थापित किया है, इस ईमारत के निर्माण का पूर्ण देख रेख का काम सम्राट अशोक की पत्नी देवी ने किया था , सबसे महत्वपूर्ण बाण इस स्तूप की ये है की ये बुद्ध की अस्थियो के अवशेष को सुरक्षित रखने हेतु बनाया गया था, इस इमारत के चारो ओर तोरण द्वार है जो की काफी अलङ्कृतिक है, यह पूरी ईमारत ईंटो की बानी हुयी है, जो की मौर्यकालीन प्रथम ईमारत है।

About Elephanta Caves , Maharashtra

एलीफेंटा की गुफाये भारत के राज्यों में पश्चिमित तट पर स्थित महाराष्ट्र राज्य में मुंबई से कुछ दुरी पर स्थित एक घारपुरी द्वीप पर स्थित है, इन गुफाओं की स्थिति अक्षांसो और देसाँतर में 18°57′30″N 72°55′50″E है, यहाँ कुछ गुफाये भगवान शिवजी की समर्पित है जबकि कुछ बौद्ध धर्म को, सन 1987 में यूनेस्को द्धारा विश्व धरोहर की लिस्ट में शामिल किया।




Facts about Elephanta Caves

Name Elephanta Caves
City Maharashtra
Address Elephanta Island, Maharashtra, India
Country India
Continent Asia
Came in existence 1987 (11th session)
Built by Badami Chalukyas
Area covered in KM 60 हजार वर्ग फीट के क्षेत्र
Height 6.3m
Time to visit Na
Ticket time Na
When to visit Na
Unesco heritage 6-8 वीं शताब्दी
Ref No of UNESCO 244
Coordinate 18°57′30″N 72°55′50″E
Per Day visitors Na
Near by Airport Chhatrapati Shivaji International Airport

 

Elephanta Caves in Hindi

भारत में मुम्बई के गेट वे आफ इण्डिया से लगभग १२ किलोमीटर दूर स्थित एक स्थल है जो अपनी कलात्मक गुफ़ाओं के कारण प्रसिद्ध है। यहाँ कुल सात गुफाएँ हैं। मुख्य गुफा में २६ स्तंभ हैं,जिसमें शिव को कई रूपों में उकेरा गया हैं। पहाड़ियों को काटकर बनाई गई ये मूर्तियाँ दक्षिण भारतीय मूर्तिकला से प्रेरित है। इसका ऐतिहासिक नाम घारपुरी है। यह नाम मूल नाम अग्रहारपुरी से निकला हुआ है।

एलिफेंटा नाम पुर्तगालियों द्वारा यहाँ पर बने पत्थर के हाथी के कारण दिया गया था। यहाँ हिन्दू धर्म के अनेक देवी देवताओं कि मूर्तियाँ हैं। ये मंदिर पहाड़ियों को काटकर बनाये गए हैं। यहाँ भगवान शंकर की नौ बड़ी-बड़ी मूर्तियाँ हैं जो शंकर जी के विभिन्न रूपों तथा क्रियाओं को दिखाती हैं। इनमें शिव की त्रिमूर्ति प्रतिमा सबसे आकर्षक है। यह मूर्ति २३ या २४ फीट लम्बी तथा १७ फीट ऊँची है। इस मूर्ति में भगवान शंकर के तीन रूपों का चित्रण किया गया है। इस मूर्ति में शंकर भगवान के मुख पर अपूर्व गम्भीरता दिखती है।

Elephanta Caves History in English

There is no written evidence to the caves of Elephanta, who erected them, some people made them attach to the credit of the Pandavas to some Banasur Shiva devotee, even if the two assume any historical source we’re not denying that, because they do not know any actual date to be set by the manufacture, nor any information about them, it turns out to you is that their construction is 5 V to 8 V century.

The historic Sroto just so turns out the then Konkan Mauryan rulers the Badami Chalukya ruler Pulkeshn second the Naval War was defeated and the war of 635 AD was the Pulkeshn II’s reign 60 9 642 AD is known as the Elifanta Purika whole or as it was used then was the capital of Mauryan rulers.

They also claimed that some of the later Rashtrakutas Shasko Gufao is built under his rule, from the 7th to the 8th century, it was built Bic.

Elephanta much longer ruled by the Chalukya rulers, who was under the Sultan of Gujarat in 1534 was surrendered Purtgaliye, Marathi is nowadays known as the Gufao Garapuri the mountainous area which means, The Portuguese it also said the Elephanta Island.

The main cave Year 1 9 70 opened to the public and year 1 9 87 This UNESCO World Heritage List were placed in, according to UNESCO, these man-made wonders and the actual work which our social heritage which such humanity Udbhodit which said either today or has been completely extinct.

एलिफेंटा गुफा किसने बनवाया

एलिफेंटा की गुफाओं के लिए कोई लिखित प्रमाण नहीं है की इनको किसने बनवाया है, कुछ लोग इनको बनाये जाने का श्रेय पांडवो को देते है तो कुछ परम शिव भक्त बाणासुर को, पर इन दोनों को भी अगर मान लेते है तो किसी भी ऐतिहासिक श्रोत को हम नकार नही रहे है, क्योंकि इनके बनाये जाने की वास्तविक तिथि किसी को नहीं पता और न ही इनके निर्माणकर्ता के बारे में कोई जानकारी है, है इतना अवश्य पता चला है की इनका निर्माण ५वी से ८वी शताब्दी में हुआ है.

Elephanta Caves History in Hindi

उस समय के ऐतिहासिक श्रोतो से सिर्फ इतना पता चला है की तत्कालीन कोंकण के मौर्य शासको को बादामी के चालुक्य शासक पुल्केशन द्वतीय ने नवल के युद्ध में पराजित किया था और ये युद्ध भी ६३५ ईस्वी में हुआ था, क्योंकि पुल्केशन द्वितीय का शासन काल ६०९ से ६४२ ईस्वी रहा है, उस समय एलिफैंटा को पूरी या पुरिका के नाम से जाना जाता था और ये तत्कालीन मौर्य शासको की राजधानी थी.

कालांतर के राष्ट्रकूट शाशको ने भी ये दावा किया की कुछ गुफाओ का निर्माण उनके शासन काल में हुआ है, उन्होंने ७वी से ८वी शताब्दी के भीच इसका निर्माण करवाया था.

Information about Elephanta Caves in Hindi

एलिफेंटा को काफी लंबे समय तक चालुक्य शासको द्वारा शासित रहा फिर गुजरात के सुल्तान ने अधीन रहा जिसने १५३४ में पुर्तगालिये समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था, मराठी भाषा में आजकल इन गुफाओ को घारापुरी के नाम से जाना जाता है जिसका मतलब होता है पहाड़ी इलाका , पुर्तगालियो ने भी इसको एलिफेंटा आइलैंड कहा था।

मुख्य गुफा को वर्ष १९७० में जनता के लिए खोला गया और वर्ष १९८७ में इसको यूनेस्को के विश्व धरोहर सूचि में रखा गया, यूनेस्को के अनुसार ये मानव निर्मित अद्भुत और वास्तविक कृति है जो की हमारी सामाजिक धरोहर है जो ऐसी मानवता को उद्भोदित करती है जो या तो आज भी कही है या पूर्ण रूप से विलुप्त हो गयी है।

Facts and History of Agra Fort, Agra, Uttar Pradesh, India

Facts about Agra Fort

Name Agra Fort
City Agra,
Address Agra, Uttar Pradesh, India
Country India
Continent Asia
Came in existence 1983 (7th session)
Built by Shah Jahan
Area covered in KM 2.5 km
Height 170 m
Time to visit 6 AM to 5: 30 PM
Ticket time 6 AM to 5: 30 PM
When to visit
Unesco heritage yes
Ref No of UNESCO 251
Coordinate 27.179542°N 78.021101°E
Per year visitors 3 million
Near by Airport nternational Airport
Near by River Yamuna

आगरा के किले का इतिहास

01

आगरा फोर्ट के लिए प्रवेश अमर सिंह गेट के माध्यम से ही अनुमति दी है। यह किला बहुत विशाल है, वर्ष 1628 में इसे शाहजहां द्वारा बनवाया गया था, शाहजहां ने अपने आखिरी दिन इसी किले में गुजारे थे, जब उसे उसके ही पुत्र औरंगजेब ने बंदी बनाकर इस किले में रखा था। शाहजहां यहां से ताजमहल को देखा करता था जो इमारत उसने खुद बनवायी थी। आगरा के किले से ताजमहल काफी सुंदर दिखायी देता है

आगरा किला ताजमहल के काफी पास ही में है इसलिये पैदल भी जा सकता हैं। करीब 2 किलोमीटर की दूरी है, सडक से ताजमहल के और इसके बीच में, किला काफी बडा है और सुंदर भी है। आगरा किला को यूनेस्को द्धारा धरोहर घोषित किया गया है आगरा किला मुगल बादशाहेा का निवास स्थान भी रहा है और इसे लाल पत्थरो से बना होने के कारण लालकिला भी कहा जाता रहा है। शाहजहां ने भी इस किले के अंदर अपनी पसंदीदा श्वेत संगमरमर की इमारते बनवाने की कोशिश की। आगरा किला पहले चौहान वंश के राजपूत राजाओ के पास था। उन पर महमूद गजनवी की सेनाओ ने आक्रमण किया था। सिंकदर लोधी यहां पर आने और रहने वाला पहला सुल्तान था। वह यहां पर रहा भी और उसने यहीं से अपना शासन चलाया। उसकी मृत्यू के बाद उसका पुत्र इब्राहिम लोधी नौ वर्षो तक यहां पर रहा। उसके बाद मुगलो ने इस पर कब्जा कर लिया। इस किले में अगाध सम्पत्ति थी जिसमें से एक कोहिनूर हीरा भी था। अकबर ने इसे अपनी राजधानी बनाया। उसने लाल बलुआ पत्थर लगवाकर इसकी हालत को सही करवाया था।

आगरा के किले की महत्वपूर्ण जानकारियां

आप रॉयल मंडप देखेंगे नगीना मस्जिद और मीना मस्जिद, मच्छी भवन, खास महल, महल और बर्गर्स तरह महलों सहित

Where is Anand Bhawan Museum

Anand Bhawan Museum, a world famous monumet is situated in Allahabad city of Uttar Pradesh India, Lat Long of Anand Bhawan Museum is 25.459376°N 81.8599815°E and address of Anand Bhawan Museum is Near Balson Chauraha, Allahabad – Faizabad Rd, Tagore Town, Allahabad, Uttar Pradesh 211001, Anand Bhawan Museum is only 15 km East from Allahabad Airport, Anand Bhawan Museum made by the India\s 1st Prime Minister Jawahar Lal Nehru’s family of Allahabad

 

Where is Anand Bhawan Museum Located in Allahabad, Uttar Pradesh India

Location of Anand Bhawan Museum Located in Allahabad, Uttar Pradesh India on Google Map

Facts about Anand Bhavan

Name Anand Bhavan
City Allahabad
Address Near Balson Chauraha, Allahabad – Faizabad Rd, Allahabad, Uttar Pradesh 211001
Country India
Continent Asia
Came in existence 1930
Built by Motilal Nehru
Area covered in KM 70.5 km2 (27.22 sq miles).
Height Height 146 x Width 200.
Time to visit 9:30 AM – 5:00 PM
Ticket time 9:30 AM – 5:00 PM
When to visit Na
Unesco heritage 35
Ref No of UNESCO Na
Coordinate 25.459376°N 81.8599815°E
Per year visitors 24 lakh
Near by Airport Allahabad Airport
Near by River Yamuna Bridge,

आनंद भवन  का इतिहास

आनंद भवन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, मोतीलाल नेहरू की पोती और जवाहरलाल नेहरू की बेटी ने 1970 में भारत सरकार को दान कर दिया था। आनंद भवन इलाहाबाद, भारत में एक ऐतिहासिक घर संग्रहालय नेहरू परिवार पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। यह 1930 के दशक में भारतीय राजनीतिक नेता मोतीलाल नेहरू द्वारा निर्माण किया गया नेहरू परिवार के निवास के रूप में सेवा करने के लिए जब मूल हवेली स्वराज भवन पहले आनंद भवन कहा जाता है भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के स्थानीय मुख्यालय में तब्दील हो गया था। जवाहर तारामंडल, तारामंडल यहाँ स्थित है,

 

Sikandra Agra, Uttar Pradesh

Sikandra is located near to Agra (Know Where is Agra) one of the best tourst city in Uttar Pradesh, Sikandra is famous just becasue of Akbar’s tomb that was made or build by his son Jahangir in between 1605 to 1613, it has accurad 119 acres land and had cost of around 1,500,000 rupees at that time to built and took 3 or 4 years to complete. The Lat Long Coordinates of this city is 27° 13′ 13.7″ N, 77° 57′ 1.7″ E

Facts about Sikandra

Name Sikandra
City Agra
Address Sikandra, Agra, Uttar Pradesh 282005, India
Country India
Continent asia
Came in existence 17th century
Built by Salim i.e Jahangir
Area covered in KM 496 feet square
Height 100 feet high
Time to visit All days of the week 6:00 .
Ticket time 08:30 am – 06:00 pm
When to visit
Unesco heritage 1986
Ref No of UNESCO 255
Coordinate 26.44°N 79.59°E
Per year visitors 20000
Near by Airport Kheria Airport
Near by River Yamuna River

सिकंदरा का इतिहास

02सिकंदरा का नाम सिकंदर लोदी के नाम पर पड़ा। मकबरे के चारों कोनों पर तीन मंजिला मीनारें हैं। ये मीनारें लाला पत्‍थर से बनी हैं जिन पर संगमरमर का सुंदर काम किया गया है। मकबरे के चारों ओर खूबसूरत बगीचा है जिसके बीच में बरादी महल है जिसका निर्माण सिकंदर लोदी ने करवाया था। सिकंदरा से आगरा के बीच में अनेक मकबरे हैं और दो कोस मीनार भी हैं। पांच मंजिला इस मकबरे की खूबसूरती आज भी बरकरार है। सिकंदरा आगरा  का सबसे महत्वपूर्ण स्थान है- अकबर का मकबरा। इसका निर्माण कार्य स्‍वयं अकबर ने शुरु करवाया था। यह मकबरा हिंदू, ईसाई, इस्‍लामिक, बौद्ध और जैन कला का सर्वोत्‍तम मिश्रण है। लेकिन इसके पूरा होने से पहले ही अकबर की मृत्‍यु हो गई। बाद में उनके पुत्र जहांगीर ने इसे पूरा करवाया। जहांगीर ने मूल योजना में कई परिवर्तन किए। इस इमारत को देखकर पता चलता है कि मुगल कला कैसे विकसित हुई।

Facts and History about Ajmer Sharif Dargah, India

Facts about Ajmer Sharif Dargah

Name Ajmer Sharif Dargah
City Ajmer,
Address Doula House , Hashmi Chowk, Gate No.4 , Dargah Sharif, Ajmer, Rajasthan 305001
Country India
Continent Asia
Came in existence 1911
Built by Sultan Mahmood Khilji,
Area covered in KM 55.76 square km.
Height 200 m
Time to visit Na
Ticket time Na
When to visit Na
Unesco heritage 1061
Ref No of UNESCO 7
Coordinate 26.4566° N, 74.6280° E
Per Day visitors Na
Near by Airport Domestic Airport to Ajmer
Near by River Luni River

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अजमेर शरीफ़ का इतिहास

दरगाह अजमेर शरीफ़ का मुख्य द्वार निज़ाम गेट कहलाता है क्योंकि इसका निर्माण १९११ में हैदराबाद स्टेट के उस समय के निज़ाम, मीर उस्मान अली ख़ाँ ने करवाया था। उसके बाद मुग़ल सम्राट शाह जहाँ द्वारा खड़ा किया गया शाहजहानी दरवाज़ा आता है। अंत में सुल्तान महमूद ख़िल्जी द्वारा बनवाया गया बुलन्द दरवाज़ा आता है, जिसपर हर वर्ष ख़्वाजा चिश्ती के उर्स के अवसर पर झंडा चढ़ाकर समारोह आरम्भ किया जाता है।ध्यान रहे कि यह दरवाज़ा फ़तेहपुर सीकरी के क़िले के बुलन्द दरवाज़े से बिलकुल भिन्न है। सन् २०१५ में ख़्वाजा चिश्ती का ८००वाँ उर्स मनाया गया था।

Facts and History about Fatehpur Sikri Agra, India

Facts about Fatehpur Sikri

Name Fatehpur Sikri
City Agra
Address Agra in Uttar Pradesh, India
Country India
Continent Asia
Came in existence 16th century
Built by Akbar
Area covered in KM 37 km
Height 54 metres
Time to visit 9.00 AM to 5.00 P.M.
Ticket time 9.00 AM to 5.00 P.M.
When to visit December,
Unesco heritage 1986
Ref No of UNESCO 255
Coordinate 27.0945° N, 77.6679° E
Per Day visitors 1000
Near by Airport Kheria Airport
Near by River Yamuna river



फतेहपुर सीकरी का इतिहास

यह भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित है,। यह यहाँ के मुगल साम्राज्य में अकबर के राज्य में 1571 से 1585 तक शासन किया फिर इसे खाली कर दिया गया। फतेहपुर सीकरी हिंदू और मुस्लिम वास्‍तुशिल्‍प के मिश्रण का सबसे अच्‍छा उदाहरण है।

फतेहपुर सीकरी मस्जिद के बारे में कहा जाता है कि यह मक्‍का की मस्जिद की नकल है और इसके डिजाइन हिंदू और पारसी वास्‍तुशिल्‍प से लिए गए हैं। मस्जिद का प्रवेश द्वार ५४ मीटर ऊँचा बुलंद दरवाजा है जिसका निर्माण १५७० ई० में किया गया था।

बाबर ने राणा सांगा को सीकरी नमक स्थान पर हराया था, जो कि वर्तमान आगरा से ४० कि०मि० है। फिर अकबर ने इसे मुख्यालय बनाने हेतु यहाँ किला बनवाया, परंतु पानी की कमी के कारण राजधानी को आगरा का किला में स्थानांतरित करना पडा़। आगरा से ३७ किमी. दूर फतेहपुर सीकरी का निर्माण अकबर ने कराया था।

Fatehpur Sikri History in Hindi

अकबर एक राजा होने के साथ-साथ वह कलाप्रेमी भी था। १५७०-१५८५ तक फतेहपुर सीकरी मुगल साम्राज्‍य की राजधानी भी रहा। इस शहर का निर्माण अकबर ने स्‍वयं अपनी निगरानी में करवाया था। अकबर नि:संतान था। संतान प्राप्ति के सभी उपाय असफल होने पर उसने सूफी संत शेख सलीम चिश्‍ती से प्रार्थना की। इसके बाद पुत्र जन्‍म से खुश और उत्‍साहित अकबर ने यहाँ अपनी राजधानी बनाने का निश्‍चय किया। आंख मिचौली, दीवान-ए-खास, बुलंद दरवाजा, पांच महल, ख्‍वाबगाह, अनूप तालाब फतेहपुर सीकरी के प्रमुख स्‍मारक हैं।

Facts and History about Bara Imambara in Hindi

Facts about Bara Imambara

Name Bada Imambara
City Lucknow
Address Near Machchhi Bhavan, Lucknow, Uttar Pradesh 226003
Country India
Continent  Asia
Came in existence 1784
Built by Asaf-ud-Daula,
Area covered in KM 2,528 square kilometres
Height 15 meters
Time to visit 10AM-6PM
Ticket time 9AM-6PM
When to visit October to March.
Unesco heritage 763
Ref No of UNESCO  NA
Coordinate 26.8690° N, 80.9131° E
Per Day visitors 25 per person for Indians; 300 per person for foreign tourists.
Near by Airport Chaudhary Charan Singh International Airport
Near by River Gomti River,

History of Bara Imambara in Hindi

बड़ा इमामबाड़ा लखनऊ की एक एतिहासिक धरोहर है। इसे भूलभुलैया भी कहते हैं। इसको  आसिफ उद्दौला ने बनवाया था। लखनऊ के इस प्रसिद्ध इमामबाड़े का ऐतिहासिक महत्व है। इस इमामबाड़े का निर्माण आसफउद्दौला ने 1784 में अकाल राहत परियोजना के अन्तर्गत करवाया था।

यह विशाल गुम्बदनुमा हॉल 50 मीटर लंबा और 15 मीटर ऊंचा है। अनुमानतः इसे बनाने में उस ज़माने में पाँच से दस लाख रुपए की लागत आई थी। यही नहीं, इस इमारत के पूरा होने के बाद भी नवाब इसकी साज सज्जा पर ही चार से पाँच लाख रुपए सालाना खर्च करते थे।

इस इमामबाड़े में एक अस़फी मस्जिद भी है जहां गैर मुस्लिम लोगों को प्रवेश की अनुमति नहीं है। मस्जिद परिसर के आंगन में दो ऊंची मीनारें हैं।

 

Facts and History about Hawa Mahal in Hindi

Facts about Hawa Mahal

Name Hawa Mahal
City Jaipur
Address Hawa Mahal Rd, Badi Choupad, Pink City, Jaipur, Rajasthan 302002
Country India
Continent Asia
Came in existence 1799
Built by Maharaja Sawai Pratap Singh.
Area covered in KM 11,117.8 square kilometres
Height 15 m
Time to visit 9:00 AM – 4:30 PM.
Ticket time 9AM-5PM
When to visit October and March
Unesco heritage Yes
Ref No of UNESCO 6053
Coordinate 26.9239° N, 75.8267° E
Per year visitors  More than one lakh
Near by Airport Jaipur
Near by River Yamuna

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हवा महल का इतिहास

हवा महल राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक राजसी-महल है। इसे सन 1798 में महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने बनवाया था और इसे किसी ‘राजमुकुट’ की तरह वास्तुकार लाल चंद उस्ता द्वारा डिजाइन किया गया था। इसकी अद्वितीय पांच-मंजिला इमारत जो ऊपर से तो केवल डेढ़ फुट चौड़ी है, बाहर से देखने पर मधुमक्खी के छत्ते के समान दिखाई देती है, जिसमें ९५३ बेहद खूबसूरत और आकर्षक छोटी-छोटी जालीदार खिड़कियाँ हैं, जिन्हें झरोखा कहते हैं।

इन खिडकियों को जालीदार बनाने के पीछे मूल भावना यह थी कि बिना किसी की निगाह पड़े “पर्दा प्रथा” का सख्ती से पालन करतीं राजघराने की महिलायें इन खिडकियों से महल के नीचे सडकों के समारोह व गलियारों में होने वाली रोजमर्रा की जिंदगी की गतिविधियों का अवलोकन कर सकें। इसके अतिरिक्त, “वेंचुरी प्रभाव” के कारण इन जटिल संरचना वाले जालीदार झरोखों से सदा ठंडी हवा, महल के भीतर आती रहती है, जिसके कारण तेज़ गर्मी में भी महल सदा वातानुकूलित सा ही रहता है।

Hawa Mahal History in Hindi

चूने, लाल और गुलाबी बलुआ पत्थर से निर्मित यह महल जयपुर के व्यापारिक केंद्र के हृदयस्थल में मुख्य मार्ग पर स्थित है। यह सिटी पैलेस का ही हिस्सा है और ज़नाना कक्ष या महिला कक्ष तक फैला हुआ है। सुबह-सुबह सूर्य की सुनहरी रोशनी में इसे दमकते हुए देखना एक अनूठा एहसास देता है।

 

Facts, History Information about Charminar, Hyderabad

Facts about Charminar

Name Charminar
City Hyderabad
Address Hyderabad, Telangana 500002
Country India
Continent Asia
Came in existence 1594 AD
Built by Quli Qutb Shah
Area covered in KM 93,971 square meters.
Height 56 m
Time to visit 9:30AM-5:30PM
Ticket time 9:30AM-5:30PM
When to visit September
Unesco heritage  NA
Ref No of UNESCO NA
Coordinate 17.3616° N, 78.4747° E
Per year visitors NA
Near by Airport Rajiv Gandhi International Airport
Near by River Musi river.

 




चारमीनार का इतिहास

आंध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद का सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण स्मारक है। चार मीनार को यहां के शासक मुहम्मद कुली कुतुब शाह ने बनवाया था। सुल्तान मुहम्मद कुली कुतुब शाह, कुतुब शाही राजवंश के पांचवें शासक 1591 ई. में चारमीनार का निर्माण किया है, के बाद शीघ्र ही वह गोलकुंडा से क्या अब हैदराबाद के रूप में जाना जाता है अपनी राजधानी को स्थानांतरित कर दिया था। वह इस प्रसिद्ध संरचना का निर्माण के उन्मूलन को मनानेइस शहर से एक प्लेग महामारी. उन्होंने कहा जाता है कि अपने शहर ravaging था प्लेग के अंत के लिए प्रार्थना की है और बहुत जगह है जहाँ वह प्रार्थना कर रही थी पर एक मस्जिद  का निर्माण की कसम खाई. चारमीनार की नींव बिछाने, जबकि 1591 में कुली कुतुब शाह प्रार्थना की: “ओह अल्लाह, इस शहर की शांति और समृद्धि के इधार प्रदान सभी जातियों के पुरुषों के लाखों चलो, creeds और धर्मों यह उनके निवास बनाने के लिए, पानी में मछली की तरह.” मस्जिद बन गए लोकप्रिय अपने चार की वजह से चारमीनार के रूप में जाना जाता है 2007 में, हैदराबादी पाकिस्तान में रहने वाले मुसलमानों के एक छोटे से छोटा कराची में बहादुराबाद पड़ोस के मुख्य क्रासिंग पर चारमीनार के अर्ध प्रतिकृति का निर्माण किया।