Ranganathaswamy Temple, Location, Facts and History in Hindi

Ranganathaswamy Temple is a world famous Heavenly Palace situated in Tiruchirappalli district at Srirangam city of Tamil Nadu, India. This temple is also known as Srirangam Temple, Thiruvaranga Tirupati, Periyakoil, Bhoologa Vaikundam, Bhogamandabam, Lat Long of Ranganathaswamy Temple is 10°51′45″N 78°41′23″E and address of Ranganathaswamy Temple, Sriramapuram, Srirangam, Tiruchirappalli, Tamil Nadu 620006, Ranganathaswamy Temple is situated 16 kilometres North East from Tiruchirapalli International Airport,0.54 KM from Srirangam Railway Station and 1 KM from Srirangam bus stand, Ranganathaswamy Temple was built during Sangam era and there is no historical evidence of builder of this temple.

Where is Ranganathaswamy Temple Located in Tiruchirappalli Tamil NaduIndia

Location Map of Srirangam Temple Tiruchirappalli in Tamil NaduIndia on Google Map

Facts about Ranganathaswamy Temple

Name Ranganathaswamy Temple or Sri Ranganathar Swamy Temple or Srirangam Temple
City Srirangam
Address Sriramapuram, Srirangam, Tiruchirappalli, Tamil Nadu 620006
District Tiruchirappalli
State Karnataka
Country India
Continent Asia
Came in existence NA
Area covered 156 acres (631,000 m²)
Height 4,116m (10,710 feet)
Time to visit 6:00 am – 9:00 pm
Ticket (Quick Darshan) INR 250 and INR 100
Ref No of UNESCO NA
Coordinate 10°51′45″N 78°41′23″E
Per year visitors 6 million visitors year
Near by Airport Tiruchirappalli Airport
Near by River kaveri

History of Ranganathaswamy Temple in Hindi

रंगनाथस्वामी मंदिर जिसे श्री रंगनाथस्वामी या श्री रंगनाथ स्वामी मंदिर या श्रीरंगम मंदिर के नाम से भी जाता है, रंगनाथस्वामी मंदिर का इतिहास बहुत ही प्राचीन है, कुछ इतिहासकार इसे इसे संगम काल का बना हुआ मानते है, कुछ कहते है की ये स्व्प्रकट है, परन्तु जिन दो ऐतिहासिक जानकारियों को सर्वाधिक मान्यता प्राप्त हुयी है वो दोनों ही श्री लंका के राजा विभीषण से जुडी हुयी है।

रंगनाथस्वामी के इतिहास का प्रारंभ भगवन राम के लंका जाने से जुड़ा हुआ है, जिसके अनुसार भगवान राम ने लंका विजय के बाद वहाँ का राजा विभीषण को बना दिया, इसके बाद एक बार विभीषण त्रिची घूमने आये तो वह के राजा धरम व्रत ने उनसे आग्रह किया की भगवान के श्री विग्रह की पूजा करना चाहते है, तो विभषण जी ने भगवान का पूजन किया और वही पर स्थापना भी कर दी।

दूसरी ऐतिहासिक श्रोत कहते है की एक बार विभीषण जी भगवान् राम से मिलने जा रहे थे तो उन्होंने यहाँ पर अपने साथ लाये हुए श्री विग्रह का पूजन किया इसके बाद भगवान ने यही पर अपने श्री विग्रह की स्थापना का आदेश दिया और ये भव्य मंदिर का निर्माण हुआ।

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