Rohtasgarh Fort, Location, Facts and History in Hindi

Rohtasgarh Fort is a world famous Heavenly Palace and one of the most beautiful and famous monuments of Bihar is situated in Rohtas district at Dehri-on-sone city of Bihar, India. Lat Long of Rohtasgarh Fort is 24.6233337°N 83.9155484°E and address of Rohtasgarh Fort, Rohtas, Bihar 821311, Rohtasgarh Fort is situated 95 kilometres North East from Gaya Airport (GAY),0.54 KM from Sasaram Railway Station and 1 KM from Sasaram bus stand, Rohtasgarh Fort was built mughal era and there is some historical evidence of builder of this fort was Shri Pratapa, but no one history writer is very sure.

Where is Rohtasgarh Fort Located in Rohtas Bihar India

Location Map of Rohtasgarh Fort Rohtas in Bihar India on Google Map

Facts about Rohtasgarh Fort

Name Rohtasgarh Fort
City Rohtas
Address Rohtas, Bihar 821311
District Rohtas
State Bihar
Country India
Continent Asia
Came in existence NA
Area covered 156 acres (631,000 m²)
Height 1,11 feet
Time to visit 6:00 am – 5:00 pm
Ticket NA
Ref No of UNESCO NA
Coordinate 24.6233337°N 83.9155484°E
Per year visitors 1.6 million visitors year
Near by Airport Gaya Airport
Near by River Sone River

History of Rohtasgarh Fort in Hindi

बिहार के रोहतास जिला में स्तिथ रोहतास गढ़ का किला विश्व के प्राचीन व विशाल किलों में शुमार किया जाता है। रोहतास गढ़ का किला लगभग दो हजार फीट की उंचाई पर स्थित है।

बहुत दिनों तक यह किला हिन्दू राजाओं के अधिकार में रहा था, लेकिन 16वीं सदी में मुसलमानों के अधिकार में चला गया था और अनेक वर्षों तक उनके ही अधीन रहा था। बताया जाता है कि स्वतंत्रता संग्राम की पहली लड़ाई (1857) के समय अमर सिंह ने यही से अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का संचालन किया था।

लोगों का मानना है कि वो राजा रोहिताश्व के आत्मा की आवाज थी। इस आवाज को सुनकर हर कोई डर जाता था। फ्रांसीसी इतिहासकार बुकानन ने लगभग दो सौ साल पहले रोहतास की यात्रा की थी, तब उन्होंने भी पत्थर से निकलने वाले खून की चर्चा एक दस्तावेज में की थी। उन्होंने कहा था कि इस किले की दीवारों से खून निकलता है। इस प्राचीन और मजबूत किले का निर्माण त्रेता युग में अयोध्या के सूर्यवंशी राजा त्रिशंकु के पौत्र व राजा सत्य हरिश्चंद्र के पुत्र रोहिताश्व ने कराया था।

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