शेखावाटी का इतिहास

शेखावाटी उत्तर-पूर्वी राजस्थान का एक अर्ध-शुष्क ऐतिहासिक क्षेत्र है। राजस्थान के वर्तमान सीकर और झुंझुनू जिले शेखावाटी के नाम से जाने जाते हैं इस क्षेत्र पर आजादी से पहले शेखावत क्षत्रियों का शासन होने के कारण इस क्षेत्र का नाम शेखावाटी प्रचलन में आया।

रामगढ शेखावाटी की स्थापना विक्रम सवंत 1848 ईसवी में सीकर रावराजा द्वारा चूरु के महाजन व्यापारी परिवारों के 21 बही खातो को लाकर रामगढ नगर को बसाने के लिये की थी। इससे पूर्व यह स्थान नासा की ढाणी के नाम से जाना जाता था।

भारत का पेरिस शेखावाटी बड़ा रोचक ही नही, गौरवशाली भी है …

●रामायणकाल की अगर बात करें, तो उस समय शेखावाटी था ही नही, यहां विशाल समुद्र लहराता था ●महाभारतकाल में यहां राजा विराट का शासन रहा, अर्जुन अज्ञातवाश में राजा विराट के राज्य में ही रहें थे ।
●काफी समय तक यह क्षेत्र वीरान पड़ा रहा, शक हूण आक्रमणों के समय हिन्दू आबादी एवं विदेशी आबादियों का यहां आना शुरू हुआ ।
●मध्यकाल से पूर्व यहां प्रतिहारो का शासन रहा, उसके बाद शेखावाटी चौहानों के नियंत्रण में आया ।●पृथ्वीराज चौहान की पराजय के बाद मूहम्मद गौरी एवं अफगान तुर्क वंश का शासन यहां स्थापित हो गया, 1200 ईस्वी से लेकर 13वी सदी के अंत तक लगभग 100 वर्ष चौहानों ने शेखावाटी में तुर्को से द्वंद किया लेकिन ददरेवा के चौहान राजा कायमसिंह के इस्लाम मे कन्वर्ट हो जाने के बाद, इस प्रदेश के क्या हाल हुए होंगे, कोई भी समझ सकता है …

क्रूरता के आगे राजाओ को ही धर्म बदलना पड़ा, प्रजा की तो बात ही क्या थी ?? ददरेवा के चौहान राजा के इस्लाम मे दीक्षित हो जाने के बाद पूरा राजस्थान ही नही, पूरा भारत ही असुरक्षित हो गया । क्यो की अब दिल्ली से गुजरात और उसके बाद अरब तक पहुंचने के मार्ग में बड़ी दूरी घट जाती ….

आमेर के क्षत्रियो ने शेखावाटी के उद्धार के लिएआमेर के महाराज उदयकर्ण जी के पुत्रकुंवर शेखाजी को जिम्मेदारी दी गयी, की वह शेखावाटी से मल्लेछो का सफाया करें ।जितना काम शेखाजी को दिया गया था, कुंवर शेखाजी ने उससे चार गुणा ज़्यादा सफलता हासिल की ….शेखावाटी से तुर्को को पूर्णतः सफाया हो गयाजो बचे थे, वह मेवात की ओर भाग गए थे ।

शेखाजी ने हरियाणा के भिवानी तक का क्षेत्रकैप्चर कर लिया था, जो दिल्ली आगरा से ज़्यादा दूर नही है ….कच्छवाहो ने केवल तलवार की राजनीति नही की, उनकी राजनीति व्यापार की राजनीति थी, भारत वर्ष के श्रेष्ठ व्यापारी, शुद्र कारीगर उर्फ इंजीनियर आदि को शेखावाटी में बसाया गयायहां एक भी आदमी गरीब नही था शेखावतों के काल मे कोई भी पढ़ा लिखा व्यक्तिछोटे मकान में नही रहता थाउसका अपना निजी महल होता था।

आज भी शेखावाटी में जितनी अधिक हवेलियां हैछोटे से कम से कम क्षेत्र में उतनी अधिक हवेलियांशायद ही किसी नगर में होओर यह सभी हवेलियां गांवों में है ।मध्यकाल में हिंदुओं का केवल गरीबी का इतिहास नही रहा ,उसी मध्यकाल में कच्छवाह शासन के यहां जीवन बसर कर रही प्रजा,गरीब नही थी । अन्य राज्यो में जैसे महल सुल्तानों को मयस्सर नही थे वैसे महलों में शेखावाटी की आम जनता रहती थी …

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