Facts and History about Elephanta Caves , Maharashtra

Facts about Elephanta Caves

Name Elephanta Caves
City Maharashtra
Address Elephanta Island, Maharashtra, India
Country India
Continent Asia
Came in existence 1987 (11th session)
Built by Badami Chalukyas
Area covered in KM 10 kilometres (6.2 mi)
Height 6.3m
Time to visit Na
Ticket time Na
When to visit Na
Unesco heritage 1987
Ref No of UNESCO 244
Coordinate 18°57′30″N 72°55′50″E
Per Day visitors Na
Near by Airport Chhatrapati Shivaji International Airport
Near by River Ganges

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एलिफेंटा की गुफाएँ

भारत में मुम्बई के गेट वे आफ इण्डिया से लगभग १२ किलोमीटर दूर स्थित एक स्थल है जो अपनी कलात्मक गुफ़ाओं के कारण प्रसिद्ध है। यहाँ कुल सात गुफाएँ हैं। मुख्य गुफा में २६ स्तंभ हैं,जिसमें शिव को कई रूपों में उकेरा गया हैं। पहाड़ियों को काटकर बनाई गई ये मूर्तियाँ दक्षिण भारतीय मूर्तिकला से प्रेरित है। इसका ऐतिहासिक नाम घारपुरी है। यह नाम मूल नाम अग्रहारपुरी से निकला हुआ है। एलिफेंटा नाम पुर्तगालियों द्वारा यहाँ पर बने पत्थर के हाथी के कारण दिया गया था। यहाँ हिन्दू धर्म के अनेक देवी देवताओं कि मूर्तियाँ हैं। ये मंदिर पहाड़ियों को काटकर बनाये गए हैं। यहाँ भगवान शंकर की नौ बड़ी-बड़ी मूर्तियाँ हैं जो शंकर जी के विभिन्न रूपों तथा क्रियाओं को दिखाती हैं। इनमें शिव की त्रिमूर्ति प्रतिमा सबसे आकर्षक है। यह मूर्ति २३ या २४ फीट लम्बी तथा १७ फीट ऊँची है। इस मूर्ति में भगवान शंकर के तीन रूपों का चित्रण किया गया है। इस मूर्ति में शंकर भगवान के मुख पर अपूर्व गम्भीरता दिखती है।




Elephanta Caves History in English

There is no written evidence to the caves of Elephanta, who erected them, some people made them attach to the credit of the Pandavas to some Banasur Shiva devotee, even if the two assume any historical source we’re not denying that, because they do not know any actual date to be set by the manufacture, nor any information about them, it turns out to you is that their construction is 5 V to 8 V century.

The historic Sroto just so turns out the then Konkan Mauryan rulers the Badami Chalukya ruler Pulkeshn second the Naval War was defeated and the war of 635 AD was the Pulkeshn II’s reign 60 9 642 AD is known as the Elifanta Purika whole or as it was used then was the capital of Mauryan rulers.

They also claimed that some of the later Rashtrakutas Shasko Gufao is built under his rule, from the 7th to the 8th century, it was built Bic.

Elephanta much longer ruled by the Chalukya rulers, who was under the Sultan of Gujarat in 1534 was surrendered Purtgaliye, Marathi is nowadays known as the Gufao Garapuri the mountainous area which means, The Portuguese it also said the Elephanta Island.

The main cave Year 1 9 70 opened to the public and year 1 9 87 This UNESCO World Heritage List were placed in, according to UNESCO, these man-made wonders and the actual work which our social heritage which such humanity Udbhodit which said either today or has been completely extinct.

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Elephanta Caves History in Hindi

एलिफेंटा की गुफाओं के लिए कोई लिखित प्रमाण नहीं है की इनको किसने बनवाया है, कुछ लोग इनको बनाये जाने का श्रेय पांडवो को देते है तो कुछ परम शिव भक्त बाणासुर को, पर इन दोनों को भी अगर मान लेते है तो किसी भी ऐतिहासिक श्रोत को हम नकार नही रहे है, क्योंकि इनके बनाये जाने की वास्तविक तिथि किसी को नहीं पता और न ही इनके निर्माणकर्ता के बारे में कोई जानकारी है, है इतना अवश्य पता चला है की इनका निर्माण ५वी से ८वी शताब्दी में हुआ है.

उस समय के ऐतिहासिक श्रोतो से सिर्फ इतना पता चला है की तत्कालीन कोंकण के मौर्य शासको को बादामी के चालुक्य शासक पुल्केशन द्वतीय ने नवल के युद्ध में पराजित किया था और ये युद्ध भी ६३५ ईस्वी में हुआ था, क्योंकि पुल्केशन द्वितीय का शासन काल ६०९ से ६४२ ईस्वी रहा है, उस समय एलिफैंटा को पूरी या पुरिका के नाम से जाना जाता था और ये तत्कालीन मौर्य शासको की राजधानी थी.

कालांतर के राष्ट्रकूट शाशको ने भी ये दावा किया की कुछ गुफाओ का निर्माण उनके शासन काल में हुआ है, उन्होंने ७वी से ८वी शताब्दी के भीच इसका निर्माण करवाया था.

एलिफेंटा को काफी लंबे समय तक चालुक्य शासको द्वारा शासित रहा फिर गुजरात के सुल्तान ने अधीन रहा जिसने १५३४ में पुर्तगालिये समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था, मराठी भाषा में आजकल इन गुफाओ को घारापुरी के नाम से जाना जाता है जिसका मतलब होता है पहाड़ी इलाका , पुर्तगालियो ने भी इसको एलिफेंटा आइलैंड कहा था।

मुख्य गुफा को वर्ष १९७० में जनता के लिए खोला गया और वर्ष १९८७ में इसको यूनेस्को के विश्व धरोहर सूचि में रखा गया, यूनेस्को के अनुसार ये मानव निर्मित अद्भुत और वास्तविक कृति है जो की हमारी सामाजिक धरोहर है जो ऐसी मानवता को उद्भोदित करती है जो या तो आज भी कही है या पूर्ण रूप से विलुप्त हो गयी है।

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