Facts and History of India Gate in Hindi, इण्डिया गेट का इतिहास

Facts and History of India Gate in Hindi

Facts about India Gate

Name India Gate
City Delhi
Address Rajpath, India Gate, New Delhi, Delhi 110001
Country India
Continent Asia
Came in existence 1917
Built by British India Army
Builder Sobha Singh
Area covered in KM 625 metres
Height 42 m
Time to visit 10 AM to 5 PM
Ticket time 5:00 AM – 12:00 AM
When to visit Na
Unesco heritage UNESCO in year 1983
Ref No of UNESCO 04/14/01/00040/08
Coordinate 28.6129° N, 77.2295° E
Per year visitors 4.5 M visitors per year,
Near by Airport Indira Gandhi International Airport
Near by River Yamuna river

 

History of India Gate in Hindi

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इण्डिया गेट, नई दिल्ली के राजपथ पर स्थित ४३ मीटर ऊँचा विशाल द्वार है। यह स्वतन्त्र भारत का राष्ट्रीय स्मारक है, जिसे पूर्व में किंग्सवे कहा जाता था। इसका डिजाइन सर एडवर्ड लुटियन्स ने तैयार किया था। यह स्मारक पेरिस के आर्क डे ट्रॉयम्फ़ से प्रेरित है। इसे सन् १९३१ में बनाया गया था। मूल रूप से अखिल भारतीय युद्ध स्मारक के रूप में जाने वाले इस स्मारक का निर्माण अंग्रेज शासकों द्वारा उन ९०००० भारतीय सैनिकों की स्मृति में किया गया था जो ब्रिटिश सेना में भर्ती होकर प्रथम विश्वयुद्ध और अफ़ग़ान युद्धों में शहीद हुए थे। यूनाइटेड किंगडम के कुछ सैनिकों और अधिकारियों सहित 13,300 सैनिकों के नाम, गेट पर उत्कीर्ण हैं। लाल और पीले बलुआ पत्थरों से बना हुआ यह स्मारक दर्शनीय रहा  है।

जब इण्डिया गेट बनकर तैयार हुआ था तब इसके सामने जार्ज पंचम की एक मूर्ति लगी हुई थी। जिसे बाद में ब्रिटिश राज के समय की अन्य मूर्तियों के साथ कोरोनेशन पार्क में स्थापित कर दिया गया। अब जार्ज पंचम की मूर्ति की जगह प्रतीक के रूप में केवल एक छतरी भर रह गयी है।इस अमर जवान ज्योति पर प्रति वर्ष प्रधान मन्त्री व तीनों सेनाध्यक्ष पुष्प चक्र चढ़ाकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

अमर जवान ज्योति

भारत की स्वतन्त्रता के पश्चात् इण्डिया गेट भारतीय सेना के अज्ञात सैनिकों के मकबरे की साइट मात्र बनकर रह गया है। इसकी मेहराब के नीचे अमर जवान ज्योति स्थापित कर दी गयी है। अनाम सैनिकों की स्मृति में यहाँ एक राइफ़ल के ऊपर सैनिक की टोपी सजा दी गयी है जिसके चारो कोनों पर सदैव एक ज्योति जलती रहती है। इस अमर जवान ज्योति पर प्रति वर्ष प्रधान मन्त्री व तीनों सेनाध्यक्ष पुष्प चक्र चढ़ाकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। भारतीय सेनाओं के शहीदों के लिए, जो फ्रांस और फ्लैंडर्स मेसोपोटामिया फारस पूर्वी अफ्रीका गैलीपोली और निकटपूर्व एवं सुदूरपूर्व की अन्य जगहों पर शहीद हुए और उनकी पवित्र स्मृति में भी जिनके नाम दर्ज़ हैं और जो तीसरे अफ़ग़ान युद्ध में भारत में या उत्तर-पश्चिमी सीमा पर मृतक हुए। दिल्ली की कई महत्वपूर्ण सड़कें इण्डिया गेट के कोनों से निकलती हैं। रात के समय यहाँ मेले जैसा माहौल होता है।

इण्डिया गेट के निर्माण-स्थल का इतिहास

१९२० के दशक तक, पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पूरे शहर का एकमात्र रेलवे स्टेशन हुआ करता था। आगरा-दिल्ली रेलवे लाइन उस समय लुटियन की दिल्ली और किंग्सवे यानी राजाओं के गुजरने का रास्ता, जिसे अब हिन्दी में राजपथ नाम दे दिया गया है, पर स्थित वर्तमान इण्डिया गेट के निर्माण-स्थल से होकर गुजरती थी। आखिरकार इस रेलवे लाइन को यमुना नदी के पास स्थानान्तरित कर दिया गया। तदुपरान्त सन् १९२४ में जब यह मार्ग प्रारम्भ हुआ तब कहीं जाकर स्मारक स्थल का निर्माण शुरू हो सका। ४२ मीटर ऊँचे इण्डिया गेट से होकर कई महत्वपूर्ण मार्ग निकलते हैं। पहले इण्डिया गेट के आसपास होकर काफी यातायात गुजरता था। परन्तु अब इसे भारी वाहनों के लिये बन्द कर दिया गया है। शाम के समय जब स्मारक को प्रकाशित किया जाता है तब इण्डिया गेट के चारो ओर एवं राजपथ के दोनों ओर घास के मैदानों में लोगों की भारी भीड़ एकत्र हो जाती है। ६२५ मीटर के व्यास में स्थित इण्डिया गेट का षट्भुजीय क्षेत्र ३०६,००० वर्ग मीटर के क्षेत्रफल में फैला है। इण्डिया गेट के सामने स्थित वह छतरी अभी भी ज्यों की त्यों है। इस छतरी के नीचे किसी जमाने में जार्ज पंचम की भव्य मूर्ति हुआ करती थी। भारत के आज़ाद होने के बाद उस मूर्ति को सरकार ने वहाँ से हटा कर कोरोनेशन पार्क में स्थापित कर दिया। प्रति वर्ष गणतंत्र दिवस पर निकलने वाली परेड राष्ट्रपति भवन से शुरू होकर इण्डिया गेट से होते हुए लाल किले तक पहुँचती है।

Information on India Gate in Hindi

इंडिया गेट पर ८२ हजार उन भारतीय सेनिको के नाम अंकित है, जो की १९१४ से १९२१ के बीच प्रथम विश्व युद्ध में शहीद हुए थे, ये सैनिक फ्रांस, फ़्लैंडर्स, मेसोपोटामिया, पर्शिया, पूर्वी अफ्रीका, गल्लीपोली और त्रितय एंग्लो अफगान युद्ध में शहीद हुए थे, उनके भी १३३०० नाम अंकित है।

ये इम्पीरियल वॉर ग्रेव्स कमीशन के काम का एक हिस्सा था, उनके द्वारा इस ईमारत को बनाने की अनुमति १९१७ में दी गयी, इसका बुनियादी पठत १० फरवरी १९२१ को शाम ४ बजकर ३० मिंट पर ड्यूक ऑफ़ कनॉट द्वारा राखी गयी थे, उस समय भारत के कमान्डर इन चीफ , वाइसराय और स्वयं चेम्सफोर्ड उपस्थित थे।

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