Monuments in India

Monuments in India

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Trimbakeshwar Temple Nashik Maharashtra

Trimbakeshwar Temple History in Hindi

त्रिंबकेश्वर या त्र्यंबकेश्वर में बना हुआ भगवान शिव का विशाल त्र्यंबकेश्‍वर मंदिर काले पत्‍थरों से बना है, महर्षि गौतम जी पर भगवान शिव की कृपा के कारन स्वतः प्रकट हुआ मंदिर है, एक बार महर्षि पर अन्य लोगो ने गौ हत्या का मिथ्या आरोप लगाकर छल किया जिससे स्वयं को शुद्ध करने के लिए महात्मा अगस्त ने घनघोर तप किया और भगवान के दर्शन होने पर उनसे इस धरा पर गंगा माता के अवतरण की प्रार्थना की, जिस पर भगवान शिव ने तथास्तु भी कह दिया .

किन्तु फिर माता गंगा की प्रार्थना पर भगवान ने स्वयं भी यहाँ पर ज्योतिर्लिंग स्वरूप में निवास करना स्वीकार किया, यह ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के बारह कल्याणकारी शिवलिंगों में से एक है।
मंदिर के अंदर एक छोटे से गड्डे में तीन छोटे-छोटे लिंग है, ब्रह्मा, विष्णु और शिव- इन तीनों देवों के प्रतीक माने जाते हैं। शिवपुराण के ब्रह्मगिरि पर्वत के ऊपर जाने के लिये चौड़ी-चौड़ी सात सौ सीढ़ियाँ बनी हुई हैं। इन सीढ़ियों पर चढ़ने के बाद ‘रामकुण्ड’ और ‘लष्मणकुण्ड’ मिलते हैं और शिखर के ऊपर पहुँचने पर गोमुख से निकलती हुई भगवती गोदावरी के दर्शन होते हैं।

Facts about Trimbakeshwar Temple Nashik

Nameत्रयम्बकेश्वर मंदिर(Trimbakeshwar Temple
LocationTrimbak
City Trimbakeshwar
DistrictNashik
StateMaharashtra
CountryIndia
ContinentAsia
Built in500 A.D
Built by (Re-Built)Balaji Baji Rao in 1755
Coordindates19°55′56″N 73°31′51″E
ArchitectureIndus Aryashalai
HeightAbout 1000 metres from the Sea Level
Nearest Railway StationNashik
Nearest AirportOzar Airport, Nashik

त्र्यंबकेश्वर मंदिर कहाँ पर स्थित है

त्र्यंबकेश्वर मंदिर महाराष्ट्र के नाशिक जिले में स्थित है, यह नाशिक शहर से 18 किलोमीटर दूर ब्रह्मगिरी पर्वत पर समुद्री सतह से 3000 फीट की ऊंचाई पर बना हुआ है।

Where is Trimbakeshwar Temple Located in Nashik Maharashtra India

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त्रिंबकेश्वर जाने के मार्ग

त्र्यंबकेश्वर मंदिर जाने के 2 अलग-अलग रास्ते है। नाशिक से त्रिंबकेश्वर केवल 18 किलोमीटर दूर है और इस रास्ते का निर्माण श्री काशीनाथ धाटे की सहायता से 871 AD में किया गया था।
दुसरे आसान रास्तो में इगतपुरी-त्रिंबकेश्वर का रास्ता है। लेकिन इस रास्ते से जाते समय हमें 28 किलोमीटर की लम्बी यात्रा करनी पड़ती है।

त्र्यंबकेश्वर मंदिर का निर्माण किसने करवाया था

जैसा की मान्यता है की यह एक स्वतः प्रकट भगवान शिव का मंदिर है तो इसका निर्माण किसने करवाया का उत्तर मिलना अति दुस्कर है, है समय समय पर इस मंदिर का विस्तार और पुनरूद्धार कई राजाओ ने करवाया है, कहा जाता है वर्तमान समय से ५०० वर्ष पहले सबसे पहले इस मंदिर के निमित्त कुछ कार्य किया गया था फिर मराठा साम्राज्य के तीसरे पेशवा बालासाहेब अर्थात नानासाहेब पेशवा ने करवाया था। इस मंदिर का जीर्णोद्धार सन 1755 में शुरू हुआ था, जिस काम का अंत बाद 1786 में संपन्न हुआ।

त्र्यंबकेश्वर मंदिर की विशेषता

त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग की सबसे अद्भुत और असाधारण बात तो यह है कि इसके तीन मुख(सर) हैं। एक भगवान ब्रहमा, एक भगवान विष्णु, और एक भगवान रुद्र। इस लिंग के चारों ओर एक रत्नजडित मुकुट रखा गया है जिसे त्रिदेव के मुखोटे के रुप में रखा गया है। कहा जाता है कि यह मुकुट पांडवों के समय से यहीं पर है। इस मुकुट में हीरा, पन्ना और कई बेशकीमती रत्न जुड़े हुए हैं। त्रयम्बकेश्वर मंदिर(Trimbakeshwar Temple) में इसको सिर्फ सोमवार के दिन 4 से 5 बजे तक दिखाया जाता है। इस मंदिर के पंचकोशी में कालसर्प शांती त्रिपिंडी विधि और नारायण नागबली आदि पूजा कराई जाती है।
त्रयम्बकेश्वर मंदिर(Trimbakeshwar Temple) का भव्य इमारत सिंधु आर्यशैली का अद्भुत नमूना है। इस मंदिर के भीतर एक गर्भगृह है, जिसमें प्रवेश करने के पश्चात शिवलिंग के सिर्फ आंख ही दिखाई देती है, लिंग नहीं।

Mahakaleshwar Mandir in Ujjain

भगवान शिव को समर्पित महाकालेश्वर मंदिर भगवान शिवजी के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है, यह मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में स्थित है, इस विशाल मंदिर का वर्णन पुराणों में महाभारत में और कालिदास जी की रचनाओं में भी है, इस मंदिर पर बहुत से विधर्मी विदेशी अक्रान्ताओ ने हमला किया और कोशिश की इसे नष्ट करने की परन्तु फिर भी यह मंदिर अपनी भव्यता के साथ स्थित है।

Mahakaleshwar Mandir Kaha Par Hai

भगवान शिवजी का यह विशाल मंदिर उज्जैन में छिप्रा नदी के निकट बना हुआ है, इसकी भव्यता अपने आप में विशिस्ट है, निचे दिए गए मानचित्र में उज्जैन में स्थित मंदिर को दर्शाया गया है।

Mahakaleshwar Temple Ujjain History in Hindi

महाकालेश्वर मंदिर का निर्माण कब हुआ और किसने करवाया इसके बारे में, बस विद्वानों ने इसके बारे में सिर्फ इतना कहा है की ये अति प्राचीन एवं भव्य मंदिर है, इस मंदिर पर बहुत से आतताइयों ने हमले किये, इसे नष्ट करने का प्रयास किया, लेकिन फिर भी इसकी भव्यता में कोई कमी नहीं आयी है, १२वी शताब्दी से १८वी शताब्दी तक उज्जैन में विधर्मिओं का शासन रहा और इस समय प्रत्येक मंदिर संकटग्रस्त था फिर भी जब यहाँ पर पुनः मराठो अन्य हिन्दू राजाओ का अधिपत्य हुआ तो इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया गया जिससे इसकी भव्यता में वृध्दि हुयी है।

Mahakaleshwar Temple Timings

From month Chaitra to Ashwin From month Kartik to Falgun
Bhasmarti early morning 4 am. Bhasmarti early morning 4 am.
Morning Pooja 7:00 To 7:30 am Morning Pooja 7:30 To 8:00 am
Mid-day Pooja 10:00 to 10:30 am Mid-day Pooja 10:30 to 11:00 am
Evening Pooja 5:00 to 5:30 pm Evening Pooja 5:30 to 6:00 pm
Aarti Shree Mahakal 7:00 To 7:30 pm Aarti Shree Mahakal 7:30 To 8:00 pm
Closing Time 11:00 pm Closing Time 11:00 pm

कालसर्प पूजा उज्जैन, कालसर्प दोष निवारण पूजा उज्जैन, सर्प दोष पूजा उज्जैन

Dashavatara Temple Deogarh Lalitpur Uttar Pradesh

Dashavatara Temple is a world famous temple dedicated to lord Vishnu and others in Uttar Pradesh, located in Deogarh a City of Uttar Pradesh under Deogarh City in Lalitpur District, India, Lat Long of Dashavatara Temple is 24°31′35.8″N 78°14′24.4″E and address of this temple is Dashavatara Temple, Deogarh village , Lalitpur district, Uttar Pradesh 284403, Dashavatara Temple is also locally known as ‘Sagar marh’, According to Alexander Lubotsky, Dashavatara Temple was built according to the third khanda of the Hindu epic Vishnudharmottara Purana, which describes the design and architecture of the Sarvatobhadra-style temple, the Dashavatara Temple was initially built by kings of Gupt Dynasty between late 5th-century and early 6th-century, or about 500 CE.

Facts about Dashavatara Temple Deogarh Lalitpur Uttar Pradesh

Name Dashavatara temple
City Lalitpur
Address Deogarh village , Lalitpur district, Uttar Pradesh 284403
Country India
Built by Not Known, but predicted that made during Gupta era
Came in existence 500 CE
Area covered in KM NA
Height NA
Time to visit 8AM-6PM
Ticket time NA
Ref No of UNESCO NA
Coordinate 24°31′35.8″N 78°14′24.4″E
Per year visitors 1 lakh
Near by Airport Khajuraho (IATA: HJR) and Bhopal (IATA: DBH)
Near by River Betwa River
Near by Railway Station Lalitpur

Where is Hawa Mahal, India

Hawa mahal is a world famous Heavenly Palace situated in Jaipur city of Karnataka, India, Lat Long of Hawa mahal is 17.4080° N, 78.4802° E and address of Hawa mahal, Maidan, BBD Bagh, Bijapur, Karnataka 700021, Hawa mahal is situated 350 kilometres South from Rajiv Gandhi International Airport, Hyderabad (Telangana), 8 KM from Bijapur railway station and 3 KM from Bijapur bus stand, Hawa mahal was built by Ali Adil Shah I in 1561.

Where is Hawa mahal Located in Bijapur Karnataka India

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Facts about Hawa Mahal

Name Gagan mahal
City Vijayapura
Address Gagan Mahal, DC Office Rd, Gopalpur Galli, Vijayapura, Karnataka 586101
Country India
Continent Asia
Came in existence 1561
Lat Long  
Area covered in KM 607 km
Height 17 metres
Time to visit 06:00 am – 06:00 pm.
Ticket time 06:00 am – 06:00 pm.
Ref No of UNESCO 5887
Coordinate 16°49’37″N 75°43’6″E
Per year visitors 500 year
Near by Airport Hyderabad airport
Near by River Anegundi

History of Hawa mahal in Hindi

गगन महल का इतिहास १६वी शताब्दी के इतिहास से जुड़ा हुआ है, या कर्नाटक के तत्कालीन विजयपुरम में बनाया गया था, जिसे आज बीजापुर के नाम से जाना जाता है, यह एक शाही महल था जिसमे दरबार भी लगता था, इसे १५६१ में तत्कालीन बीजापुर के शासक अली आदिल शाह प्रथम ने बनवाया था।

यह महल २७ एकड़ में बना हुआ है, २० मिटेर लम्बा है और १७ मीटर जमीन से ऊँचा है, गगन महल का प्रथम तल सही परिवार का निवास स्थान था

Arki Fort Solan Himachal Pradesh

Arki Fort is a world famous Historical Monument in Himachal Pradesh, located in Akri a City of Himachal Pradesh under Solan City in Solan District, India, Lat Long of Arki Fort is 31.152543°N 76.966374°E and address of fort is Arki Fort, Arki, Himachal Pradesh 173208, the fort was initially built by JAT king Raja Dayaram in 18th-century.

Facts about Arki Fort

Name Arki Fort
City Solan
Address Arki Fort, Arki, Himachal Pradesh 173208
Country India
Continent Asia
Came in existence 1803
Area covered in KM 1,840 km2 (710 sq mi)
Height  
Time to visit 9AM-5PM
Ticket time 9AM-5PM
Ref No of UNESCO  
Coordinate 27°36′N 78°03′E
Per year visitors  
Near by Airport Shimla Airport
Near by River Sengar and Karban

Where is Arki Fort Located in Solan Himachal Pradesh, India

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History of Arki Fort in Hindi

अर्की का किला सोलन जिले के अर्की नगर में है, जो हिमाचल प्रदेश के जिलों में से एक जिला है, इस किले को कालांतर में महल भी कहा जाने लगा था इसकी आंतरिक भव्यता और सौंदर्य के कारण, इस किले को 1695 – 1700 के बीच में तत्कालीन शासक राणा पृथ्वी सिंह ने बनवाया था, १८०६ में इस किले को गोरखाओ ने अधिग्रहित कर लिया था और भगेल के राजा ने राणा जगत सिंह ने नालागढ़ में शरण ली थी, गोरखाओ ने इस किले का प्रयोग 1806 – १८१५ के बीच हिमाचल प्रदेश में सैन्य छावनी के रूप में प्रयोग किया था।

Jhansi Fort Jhansi

Jhansi Fortis a world famous Historical Monument in Uttar Pradesh, located in Jhansi a City of Uttar Pradesh under Jhansi FortCity in Jhansi District, India, Lat Long of Jhansi Fortis 25.4579° N, 78.5756° E and address of fort is Near Lakshmi Bai Park, Jhansi, Uttar Pradesh 284001, the fort he state was annexed by the British Governor General in 1854; Damodar Rao’s claim to the throne was rejected but Rani Lakshmibai ruled it from June 1857 to June 1858.

Facts about Jhansi Fort

Name Jhansi Fort
City Jhansi
Address Near Lakshmi Bai Park, Jhansi, Uttar Pradesh 284001
Country India
Continent Asia
Came in existence 17th century.
Area covered in KM 5,024 km2
Height ‎285mt
Time to visit 7AM-6PM
Ticket time 7AM-6PM
Ref No of UNESCO
Coordinate 25.4579° N, 78.5756° E
Per year visitors
Near by Airport Gwalior Airport
Near by River Pahuj River,

Where is Jhansi Fort Located in Jhansi Uttar Pradesh, India

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History of Jhansi Fort in Hindi

झाँसी भारत के उत्तर प्रदेश प्रान्त में स्थित एक प्रमुख शहर है। यह शहर उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित है और बुंदेलखंड क्षेत्र के अन्तर्गत आता है। झाँसी एक प्रमुख रेल एवं सड़क केन्द्र है और झाँसी जिले का प्रशासनिक केन्द्र भी है। झाँसी शहर पत्थर निर्मित किले के चारों तरफ़ फ़ैला हुआ है, यह किला शहर के मध्य स्थित बँगरा नामक पहाड़ी पर निर्मित है। उस समय इसे बलवंत नगर के नाम से जाना जाता था।

Hathras Fort Hathras

Hathras Fort is a world famous Historical Monument in Uttar Pradesh, located in Hathras a City of Uttar Pradesh under Hathras Fort City in Hathras District, India, Lat Long of Hathras Fort is 27°36′N 78°03′E and address of fort is Hathras Fort, Nagla Emliya, Hathras, Uttar Pradesh 204101, the fort was initially built by JAT king Raja Dayaram in 18th-century.

Facts about Hathras Fort

Name Hathras Fort
City Hathras
Address the town of Hathras in Uttar Pradesh
Country India
Continent Asia
Came in existence 1803
Area covered in KM 1,840 km2 (710 sq mi)
Height  
Time to visit 9AM-5PM
Ticket time 9AM-5PM
Ref No of UNESCO  
Coordinate 27°36′N 78°03′E
Per year visitors  
Near by Airport Kheria Airport
Near by River Sengar and Karban

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History of Hathras Fort in Hindi

हाथरस का किला हाथरस जिले में है, जो उत्तर प्रदेश के जिलों में से एक जिला है, इसे १८वी शताब्दी में जाट राजा दयाराम ने बनवाया था।

Chunar Fort Mirzapur Uttar Pradesh

Chunar Fort is a world famous Historical Monument in Uttar Pradesh, located in Tammanpatti a City of Uttar Pradesh under Mirzapur City in Mirzapur District, India, Lat Long of Chunar Fort is 25.1255°N 82.8747°E and address of fort is Chunar fort, Tammanpatti, Mirzapur, Uttar Pradesh 231304, the fort was initially built by King Sahadeo in 1029 AD then reconstructed by Sher Khan in 1532, Sher Shah Suri in 1538 and Akbar 1575 AD.

चुनारगढ़ का रहस्य

चुनारगढ़ के किले का वर्णन सबसे पहले देवकी नंदन खत्री के प्रसिद्द उपन्यास चंद्रकांता में हुआ है, वैसे किसी भी पुस्तक या किसी और ने यहाँ पर किसी प्रकार के रहस्य की बात नहीं बताई है, है अभी कुछ समय पहले चुनार के किले में खजाना है ऐसा शोर जरूर हुआ था लेकिन यह भी एक हवा ही थी, वैसे “चुनार किला का खजाना” हो भी सकता है क्युकी यहाँ पर बहुत से राजाओ ने राज्य किया है यहाँ तक की अंग्रेजो का भी अधिपत्य कुछ समय के लिए रहा है, इसलिए इस किले में खजाना होना कोई विचित्र बात नहीं होगी।
वैसे इस किले में सोनवा मण्डप, सूर्य धूपघड़ी और विशाल कुंआ मौजूद है, आदि-विक्रमादित्य का बनवाया हुआ भतृहरि मंदिर है जिसमें उनकी समाधि है

चुनार का किला किसने बनवाया था

चुनार का किला सर्वप्रथम ११वी शताब्दी में वाराणसी के राजा सहदेव ने गंगा नदी के दूसरे मुहाने पर शत्रुओ से अपने राज्य एवं प्रजा की रक्षा के लिए १०२९ ईसवी में बनवया था, इसके बाद अन्य राजाओ जैसे उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य ने कुछ निर्माण कार्य करवाया, उनके बाद इस किले पर 1141 से 1191 ई. तक पृथ्वीराज चौहान ने बहुत सरे निर्माण कार्य करवाए इसके बाद शेरखान ने १५३२, शेरशाह सूरी ने १५३८ और उसके बाद अकबर ने १५७५ भी कुछ कुछ जीर्णोद्धार करवाए, इस प्रकार यह प्रश्न की “चुनार का किला किसने बनवाया था” का उत्तर है राजा सहदेव ने १०२९ ईसवी में.

Facts about Chunar Fort

Name Chunar Fort
City Mirzapur
Address Tammanpatti, Uttar Pradesh 231304
District Mirzapur
Country India
Continent Asia
Came in existence 1029 AD
Area covered in KM 45 km
Height 280 feet (85 m)
Time to visit 9AM-5PM
Ticket time 9AM-5PM
Ref No of UNESCO NA
Coordinate 25.1234° N, 82.8757° E
Per year visitors More than 2 lakh
Near by Airport Lal Bahadur Shastri International Airport
Near by River Ganges River.
Built by King Sahadeo

Where is Chunar Fort Located in Mirzapur Uttar Pradesh, India

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History of Chunar Fort in Hindi

चुनार का किला मिर्ज़ापुर जिले में है, जो उत्तर प्रदेश के जिलों में से एक जिला है, इसे १०२९ में राजा सहदेव ने बनवाया था जो की गंगा जी के किनारे पर ही बना हुआ है, उनके बाद इस किले पर शेरशाह सूरी का अधिपत्य हुआ और फिर अकबर का इन दोनों ने भी कुछ काम करवाया था, या समुद्र तल से २८ मीटर की ऊंचाई पर है और उत्तर प्रदेश की विंध्य रेंज में आता है।

Allahabad Fort Allahabad Uttar Pradesh

Allahabad Fort is a world famous Historical Monument in Uttar Pradesh, located in Allahabad a City of Uttar Pradesh under Allahabad City in Allahabad District, India, Lat Long of Allahabad Fort is 27.9284684°N 78.0571125°E and address of fort is Allahabad fort, Allahabad, Uttar Pradesh 211005, Allahabad Fort was named by Akbar the fort Illahabas means “blessed by God”, which later became “Allahabad” and entire city renamed Allahabad, the fort was initially built by Akbar in 1583 according to Abu’l-Fazl the writer of Akbarnama but again reconstruced by Archaeological Survey of India as a monument of national importance.

Facts about Allahabad Fort

Name Allahabad Fort
City Allahabad
Address Allahabad fort, Allahabad, Uttar Pradesh 211005
Country India
Continent Asia
Came in existence 1583 A.D
Area covered in KM 70.5 km2 (27.22 sq miles)
Height 35 ft
Time to visit 8AM-6PM
Ticket time 8AM-6PM
Ref No of UNESCO NA
Coordinate 25.4294° N, 81.8769° E
Per year visitors More than one lakh
Near by Airport Allahabad Airport
Near by River Ganges.
Built by Akbar

Where is Allahabad Fort Located in Uttar Pradesh, India

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History of Allahabad Fort in Hindi

इलाहाबाद का किला उत्तर प्रदेश के जिले में एक किला है, यह इलाहाबाद में है जो की इलाहाबाद जिले में आता है स्थित है, इसे १५८३ में अकबर ने बनवाया था जो की यमुना और गंगा जी के संगम पर ही बना हुआ है, कहा जाता है की अकबर ने इस किले को उत्तर प्रदेश में हिन्दुओ से कर एकत्रित करने के लिए बनवाया था जो की संगम पर आते है, लेकिन इस काम के लिए किले का बनवाया जाना थोड़ा अजीब लगता है।

Aligarh Fort Aligarh Uttar Pradesh

Aligarh Fort is a world famous Historical Monument in Uttar Pradesh, located in Aligarh a City of Uttar Pradesh under Aligarh City in Aligarh District, India, Lat Long of Aligarh Fort is 27.9284684°N 78.0571125°E and address of fort is Aligarh Fort, Qila, Aligarh, Uttar Pradesh 202001, Aligarh Fort is also known as “bohne chor ka qila” in English it can be say ‘small thief’s fort’, the fort was initially built by Muhammad, son of Umar the governor of Kol, in 1524-25.

Facts about Aligarh Fort

Name Aligarh Fort
City Aligarh
Address Qila, Aligarh, Uttar Pradesh 202001
Country India
Built by Muhammad, son of Umar the governor of Kol
Came in existence 1524-25
Area covered in KM 203 kilometres (126 mi)
Height 32 feet height
Time to visit 8AM-6PM
Ticket time 8AM-6PM
Ref No of UNESCO NA
Coordinate 27.9325° N, 78.0615° E
Per year visitors 1 lakh
Near by Airport Agra international airport
Near by River Yamuna rivers.

Where is Aligarh Fort Located in Uttar Pradesh, Aligarh, India

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History of Aligarh Fort in Hindi

अलीगढ़ का किला उत्तर प्रदेश के जिले में एक किला है, यह अलीगढ में है जो की अलीगढ जिले में आता है स्थित है, इसे १५२५ में तत्कालीन लोदी साम्राज्य में कोल के गवर्नर उम्र के बेटे मुहम्मद ने बनवाया था इसके बाद साबित खान जो की फारुख सियार और मुहम्मद सियार के समय में उत्तर प्रदेश के गवर्नर थे उन्होंने इसका पुनर्निर्माण करवाया था। इस किले पर मराठो का अधिपत्य रहा और वर्तमान समय में यहाँ पर एक प्राथमिक स्कूल चल रहा है।

अलीगढ का किला

अलीगढ़ के किले का महत्व १७५९ में जब माधवराव सिंधिया प्रथम मराठा साम्राज्य के अधिपति थे तब सबसे अधिक रहा था क्युकी इसी अलीगढ के किले में वो अपनी सेनाओ का फ़्रांसिसी सेनिको के द्वारा एउरोपियन तर्ज पर प्रशिक्षण दिलवाते थे, जो प्रमुख प्रशिक्षक था उसका नाम बेनोइट दे बोइने था, अलीगढ का किला अल्ल्य घुर के युद्ध में मराठो के हाथो से निकल कर अंग्रेजो के हाथो में चला गया था, जिसे गेनार्ड लेक के फ़्रांसिसी अधिकारी पेरन के नेतृत्व में १८०३ में अधिगृहित किया गया था, १८५७ के स्वतंत्रता संग्राम के समय भी अलीगढ का किला महत्वपूर्ण रहा।

अलीगढ का किला अलीगढ मुस्लिम विश्वविधयालय के उत्तरी दिशा में है और अलीगढ की किले की वर्तमान समय में देख रेख की जिम्मेदारी भी अलीगढ विश्वविद्यालय की ही है और इसके बहुत से भागो का प्रयोग विश्वविद्याल अपनी वनस्पति विज्ञानं के विभागों के रूप में कर रही है।

यह किला बहुत से शासको का शासन देख चूका है, जन्म साबित खान, महाराजा सूरजमल १७५३ में, माधवराव सिंधीअ १७५९।