Ramappa temple Telangana

तेलंगाना के पालमपेट में स्थित मशहूर रामप्पा मंदिर (Ramappa Temple) को यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल कर लिया गया है. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने राज्य की जनता को बधाई दी और देशवासियों से निजी अनुभव के लिए वहां का दौरा करने का आग्रह किया.

पीएम मोदी ने यूनेस्को की तरफ से किए गए ट्वीट को शेयर करते हुए लिखा कि शानदार! सभी को बहुत-बहुत बधाई, खासकर तेलंगाना की जनता को. प्रतिष्ठित रामप्पा मंदिर महान काकतीय वंश की उत्कृष्ट शिल्प कला को दर्शाता है. मैं आप सभी से आग्रह करूंगा कि इस भव्य मंदिर परिसर का जरूर दौरा करें और इसकी भव्यता को खुद अनुभव करें.

Excellent! Congratulations to everyone, specially the people of Telangana.

The iconic Ramappa Temple showcases the outstanding craftsmanship of great Kakatiya dynasty. I would urge you all to visit this majestic Temple complex and get a first-hand experience of it’s grandness. https://t.co/muNhX49l9J pic.twitter.com/XMrAWJJao2

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने ऐतिहासिक रामप्पा मंदिर को विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता देने के यूनेस्को के फैसले की सराहना की. राव ने यूनेस्को के सदस्य राष्ट्रों, केंद्र सरकार को उसके समर्थन के लिए धन्यवाद दिया. इसी क्रम में तेलंगना के पर्यटन मंत्री वी श्रीनिवास गौड़ ने ट्विटर पर कहा कि यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि काकतीय युग के 800 साल पुराने रामप्पा मंदिर को यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थल के रूप में अंकित किया गया है.

गौरतलब है कि रामप्पा मंदिर का निर्माण 13वीं शताब्दी में किया गया था. इसका नाम इसके शिल्पकार रामप्पा के नाम पर रखा गया है. सरकार ने 2019 के लिए यूनेस्को को इसे विश्व धरोहर स्थल के तौर पर मान्यता देने का प्रस्ताव दिया था. आज लगभग 2 साल के लंबे इंतजार के बाद यूनेस्को ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है, और रामप्पा मंदिर को विश्व धरोहर स्थल के तौर पर मान्यता दे दी है.

सबसे बड़ी बात यह है कि उस काल में बने ज्यादातर मंदिर खंडहर में तब्दील हो चुके हैं, लेकिन कई आपदाओं के बाद भी इस मंदिर को कोई खास नुकसान नहीं पहुंचा है. यह मंदिर हजार खंभों से बना हुआ है. यह तेलंगाना की प्राचीन संस्कृति की समृद्धि का प्रमाण है.

भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर में मुख्य रूप से रामलिंगेश्वर स्वामी की पूजा होती है. इसका निर्माण 13वीं शताब्दी में हुआ था. मंदिर को शिल्पकार रामप्पा का नाम दिया गया, जिसने 40 वर्षों के अथक प्रयास के बाद इसका निर्माण किया था. छह फीट ऊंचे सितारे जैसे प्लेटफार्म पर निर्मित यह मंदिर वास्तु शिल्प का अद्भुत नमूना है.

इस मंदिर में शिव, श्री हरि और सूर्य देवता की प्रतिमाएं स्‍थापित हैं. यह हजार खंभों पर बना प्राचीन वास्‍तु शिल्‍प का बेजोड़ नमूना है. इसका विशाल प्रवेश द्वार काफी आकर्षक है. मंदिर पर बनी मनमोहक नक्‍काशि‍यां बरबस ही लोगों का ध्‍यान खींच लेती हैं.

Chennakeshava Temple Belur

The Chennakeshava Temple, also referred to as Keshava, Kesava or Vijayanarayana Temple of Belur, is a 12th-century Hindu temple in the Hassan district of Karnataka state, India. It was commissioned by King Vishnuvardhana in 1117 CE, on the banks of the Yagachi River in Belur also called Velapura, an early Hoysala Empire capital. The temple was built over three generations and took 103 years to finish

Where is Chennakeshava Temple Located

Facts about Chennakeshava Temple

NameChennakeshava Temple
CityBelur
DistrictHassan
StateKarnataka
CountryIndia
ContinentAsia
CreaterHoysala King Vishnuvardhana
Completed12th-century
Dedicated to Chennakeshava (Vishnu)
Lat Long13.162930°N 75.860593°E
Belur Chennakeshava temple timings7:30am-7:30pm

How to reach Chennakeshava Temple

The Chennakeshava Temple is located in Belur taluk in Hassan district of the Indian state of Karnataka . It is about 35 kilometres (22 mi) northwest of Hassan. The temple is about 16 kilometres (9.9 mi) from Halebidu temples. Belur has no nearby airport, and is about 200 kilometres (124 mi) west of Bengaluru (IATA Code: BLR) (Where is Bengaluru)about 3.5 hours drive accessible with a four lane NH75 highway. Hassan is the closest city near Belur (Where is Belur) that is connected by railway network to major cities of Karnataka

Where is Bugga Ramalingeswara Swamy Temple

Bugga Ramalingeswara Swamy temple is dedicated to Bhgwan Shiv, this Siva shrine situated on the southern bank of the Penna river in Tadipatri of Anantapur district in the Andhra Pradesh state of India. Initially it was built by Pemmasani Ramalinga Nayudu I in between year 1490 and 1509, he was a Pemmasani Nayaka chieftain of the Gutti-Gandikota region during the reign of the Vijayanagara Empire.

Marundeeswarar Temple Tamil Nadu

Marundeeswarar Temple is a temple dedicated to Hindu deity Shiva, located in Thiruvanmiyur, Chennai one of the biggest cities of Tamil Nadu and adjacent to the beach of Bay of Bengal. It is one of the 275 Paadal Petra Sthalams and no Navagraha where the two of the most revered Nayanars (Saivite Saints), Appar and Tirugnana Sambandar have glorified the temple with their verses during the 7th-8th century. The temple has been widely expanded by Chola kings during the 11th century.

Marundeeswarar Temple and Tank glow in the morning
Thanks to wikipedia for Marundeeswarar Temple and Tank glow in the morning 

Facts about Marundeeswarar Temple

Name“Marundeeswarar Temple
CityThiruvanmiyur, Chennai
StateTamilnadu
Architecture TypeTamil architecture
Creater DynastyCholas
Dedicated to GodShiva
Lat Long12°59′08″N 80°15′41″E
Commisioned in year11th Century
King That time Rajendra Chola
Total Stories20
Nearest Railway Station“Thiruvanmiyur railway station
Nearest AirportChennai

Marundeeswarar Temple History

The sage Valmiki, who wrote Ramayana, worshiped Shiva in the temple. Since Valmiki was blessed here, the place was to be known as Thiruvalmikiyur, which is pronounced as ‘Thiruvanmikiyur’ in Tamil, the name gradually changed to Thiruvanmiyur.

Where is located Suez Canal

Suez Canal also known in Arabic language “Qanāt al-Suways” as it is conected from Egypt so need to know its arabic name also, It is a best human made sea-level waterway running north-south across the Isthmus of Suez in Egypt to connect the Mediterranean and the Red seas. This canal actully separates the African continent from Asia continent, and it provides the shortest maritime route between Europe and the lands lying around the Indian and western Pacific oceans, this is the reason India get a lot of benefits from this, as this was made in British era for their own benefits those they got from India.

Quick Facts about Suez Canal

NameSuez Canal
Name id ArabicQanāt al-Suways
Construction began25 September 1859
Construction completedNovember 27, 1869
Length193.3 km (120.1 miles)
Minimum boat air draft68 m (223 ft)
Minimum boat draft20.1 m (66 ft)
Maximum boat beam77.5 m (254 ft 3 in)
Coordinates30°42′18″N 32°20′39″E
Located in Egypt
ConnectingMediterranean Sea to the Red Sea

As of now it is one of the world’s most heavily used shipping water way lanes. The canal extends 193 km means around 120 miles between Port Said (Būr Saʿīd) in the north and Suez in the south, with dredged approach channels north of Port Said, into the Mediterranean, and south of Suez. The canal does not take the shortest route across the isthmus, which is only 121 km around 75 miles. Instead, it utilizes several lakes: from north to south, Lake Manzala (Buḥayrat al-Manzilah), Lake Timsah (Buḥayrat al-Timsāḥ), and the Bitter Lakes—Great Bitter Lake (Al-Buḥayrah al-Murrah al-Kubrā) and Little Bitter Lake (Al-Buḥayrah al-Murrah al-Ṣughrā). The Suez Canal is an open cut, without locks, and, though extensive straight lengths occur, there are eight major bends. To the west of the canal is the low-lying delta of the Nile River, and to the east is the higher, rugged, and arid Sinai Peninsula.

Prior to construction of the canal (completed in 1869), the only important settlement was Suez, which in 1859 had 3,000 to 4,000 inhabitants. The rest of the towns along its banks have grown up since, with the possible exception of Al-Qanṭarah.

शेखावाटी का इतिहास

शेखावाटी उत्तर-पूर्वी राजस्थान का एक अर्ध-शुष्क ऐतिहासिक क्षेत्र है। राजस्थान के वर्तमान सीकर और झुंझुनू जिले शेखावाटी के नाम से जाने जाते हैं इस क्षेत्र पर आजादी से पहले शेखावत क्षत्रियों का शासन होने के कारण इस क्षेत्र का नाम शेखावाटी प्रचलन में आया।

रामगढ शेखावाटी की स्थापना विक्रम सवंत 1848 ईसवी में सीकर रावराजा द्वारा चूरु के महाजन व्यापारी परिवारों के 21 बही खातो को लाकर रामगढ नगर को बसाने के लिये की थी। इससे पूर्व यह स्थान नासा की ढाणी के नाम से जाना जाता था।

भारत का पेरिस शेखावाटी बड़ा रोचक ही नही, गौरवशाली भी है …

●रामायणकाल की अगर बात करें, तो उस समय शेखावाटी था ही नही, यहां विशाल समुद्र लहराता था ●महाभारतकाल में यहां राजा विराट का शासन रहा, अर्जुन अज्ञातवाश में राजा विराट के राज्य में ही रहें थे ।
●काफी समय तक यह क्षेत्र वीरान पड़ा रहा, शक हूण आक्रमणों के समय हिन्दू आबादी एवं विदेशी आबादियों का यहां आना शुरू हुआ ।
●मध्यकाल से पूर्व यहां प्रतिहारो का शासन रहा, उसके बाद शेखावाटी चौहानों के नियंत्रण में आया ।●पृथ्वीराज चौहान की पराजय के बाद मूहम्मद गौरी एवं अफगान तुर्क वंश का शासन यहां स्थापित हो गया, 1200 ईस्वी से लेकर 13वी सदी के अंत तक लगभग 100 वर्ष चौहानों ने शेखावाटी में तुर्को से द्वंद किया लेकिन ददरेवा के चौहान राजा कायमसिंह के इस्लाम मे कन्वर्ट हो जाने के बाद, इस प्रदेश के क्या हाल हुए होंगे, कोई भी समझ सकता है …

क्रूरता के आगे राजाओ को ही धर्म बदलना पड़ा, प्रजा की तो बात ही क्या थी ?? ददरेवा के चौहान राजा के इस्लाम मे दीक्षित हो जाने के बाद पूरा राजस्थान ही नही, पूरा भारत ही असुरक्षित हो गया । क्यो की अब दिल्ली से गुजरात और उसके बाद अरब तक पहुंचने के मार्ग में बड़ी दूरी घट जाती ….

आमेर के क्षत्रियो ने शेखावाटी के उद्धार के लिएआमेर के महाराज उदयकर्ण जी के पुत्रकुंवर शेखाजी को जिम्मेदारी दी गयी, की वह शेखावाटी से मल्लेछो का सफाया करें ।जितना काम शेखाजी को दिया गया था, कुंवर शेखाजी ने उससे चार गुणा ज़्यादा सफलता हासिल की ….शेखावाटी से तुर्को को पूर्णतः सफाया हो गयाजो बचे थे, वह मेवात की ओर भाग गए थे ।

शेखाजी ने हरियाणा के भिवानी तक का क्षेत्रकैप्चर कर लिया था, जो दिल्ली आगरा से ज़्यादा दूर नही है ….कच्छवाहो ने केवल तलवार की राजनीति नही की, उनकी राजनीति व्यापार की राजनीति थी, भारत वर्ष के श्रेष्ठ व्यापारी, शुद्र कारीगर उर्फ इंजीनियर आदि को शेखावाटी में बसाया गयायहां एक भी आदमी गरीब नही था शेखावतों के काल मे कोई भी पढ़ा लिखा व्यक्तिछोटे मकान में नही रहता थाउसका अपना निजी महल होता था।

आज भी शेखावाटी में जितनी अधिक हवेलियां हैछोटे से कम से कम क्षेत्र में उतनी अधिक हवेलियांशायद ही किसी नगर में होओर यह सभी हवेलियां गांवों में है ।मध्यकाल में हिंदुओं का केवल गरीबी का इतिहास नही रहा ,उसी मध्यकाल में कच्छवाह शासन के यहां जीवन बसर कर रही प्रजा,गरीब नही थी । अन्य राज्यो में जैसे महल सुल्तानों को मयस्सर नही थे वैसे महलों में शेखावाटी की आम जनता रहती थी …

City of Golden Gate, San Francisco.

San Francisco a city in the comes under the California State of USA so we are not talking about the “city of golden gate in India”, the city is cultural, commercial, and financial center of Northern California.

In the San Francisco there is a strait on the west coast of North America that connects San Francisco Bay to the Pacific Ocean, since 1937, it has been spanned by the Bridge that actually connect San Francisco Peninsula and Marin Headlands.

The bridge that is in Between San Francisco Peninsula and Marin Headlands ie called Golden Gate Bridge because the bridge is situated over the strait that is called Golden Gate, so with this way we can say that San Francisco is the city which city is known as the city of golden gate.

Facts about city of golden gate.

Name City of golden gate
City San Francisco
Address Golden Gate Bridge, San Francisco, CA, USA
Country USA
Continent North America
Came in existence May 27, 1937
Area covered in KM 8,981 ft (2,737.4 m)
Height 746 ft (227.4 m)
Time to visit 4.00 am to 8.00 pm
Ticket time 4.00 am to 8.00 pm
Ref No of UNESCO 974
Coordinate 37°49′11″N 122°28′43″W
Per year visitors 10 million annual visitors
Near by Airport San Francisco Airport
Near by River Nanjing Yangtze River

Where is city of golden gate Located in USA

Location of golden gate, Located in USA. on Google Map

History of golden gate

According to most trusted encyclopedia wikipedia Before the Europeans arrived in the 18th century, the area around the strait and the bay was inhabited by the Ohlone to the south and Coast Miwok people to the north.
On August 5, 1775 Juan de Ayala and the crew of his ship San Carlos became the first Europeans known to have passed through the strait, anchoring in a cove behind Angel Island, the cove now named in Ayala’s honor. Until the 1840s, the strait was called the “Boca del Puerto de San Francisco” (“Mouth of the Port of San Francisco”). On July 1, 1846, before the discovery of gold in California, the entrance acquired a new name. In his memoirs, John C. Frémont wrote, “To this Gate I gave the name of ‘Chrysopylae’, or ‘Golden Gate’; for the same reasons that the harbor of Byzantium was called Chrysoceras, or Golden Horn.

भारत के ऐतिहासिक स्मारक

भारत के ऐतिहासिक स्मारक का जब भी जिक्र होगा, इतिहास हमे आर्यो की सभ्यता का दर्शन कराएगा, वास्तव में जो इमारते या स्मारक मौर्य काल के बाद बने है वही आज हमारी जानकारी में है, क्योंकि उसके पहले आर्यावर्त की जलवायु में निर्माण का इतना प्रचलन नहीं था, देश के अनगिनत स्मारकों को यूनेस्को ने विश्व विराषत घोसित किया है, ये एक तरफ हमारे ऐतिहासिक इमारतों के लिए अच्छा है वही दूसरी तरफ यूनेस्को के लिए भी गर्व की बात है की उनको इतने पुराने ऐतिहासिक स्मारक और इमारते ऐसी अवस्था में मिली जिनको की वो विश्व विराषत घोषित कर सके. (भारत के स्मारक और स्थान pdf download)

भारत में कौन सा स्मारक सबसे पहले बना था

प्राचीन भारत में स्मारकों अथवा इमारते बनाने का चलन नहीं था, अगर कोई राजा बनबाता भी था तो मंदिर बनवाता था, लेकिन अशोक के बौद्ध धर्म अपना लेने के बाद सबसे पहले भारत में स्मारकों के निर्माण की विधा शुरू हुयी थी, जिसमे अशोक स्तम्भ और साँची का के स्तूप प्रमुख है, अब इन दोनों में से कौन सा पहले बना है इसका सही काल क्रम पता नहीं है बस इतना ही कह सकते है ये तीसरी शतबदी ईसा पूर्व की ऐतिहासिक स्थल है। इनके अलाबा ज्ञात श्रोतो में कोई अन्य ऐतिहाइक स्मारक नहीं है।

भारत के ऐतिहासिक स्मारकों, स्थानों और प्रसिद्ध इमारतों के नाम

क्रम संख्या ऐतिहासिक स्मारक/ईमारत राज्य का नाम यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत घोषित किए गए
1 आगरे का किला उत्तर प्रदेश 1983
2 अजंता की गुफाएँ महाराष्ट्र1983
3 एलोरा की गुफाएँ महाराष्ट्र 1983
4 ताजमहल उत्तर प्रदेश 1983
5 कोणार्क मंदिर उड़ीसा 1984
6 साँची के बौद्ध स्तूप मध्य प्रदेश 1989
7 चंपानेर पावागढ का पुरातत्व पार्क गुजरात 2004
8 छत्रपति शिवाजी टर्मिनस महाराष्ट्र 2004
9 गोवा के पुराने चर्च गोवा   1986
10 एलीफैन्टा की गुफाएँ महाराष्ट्र 1987
11 फतेहपुर सीकरी उत्तर प्रदेश 1986
12 चोल मंदिर तमिलनाडु 1987, 2004
13 हम्पी के स्मारक कर्नाटक 1986
14 महाबलीपुरम के स्मारक तमिलनाडु 1984
15 पट्टाडक्कल के स्मारक कर्नाटक 1987
16 हुमायुँ का मकबरा दिल्ली   1993
17 काजीरंगा राष्ट्रीय अभ्यारण्य असम 1985
18 केवलदेव राष्ट्रीय अभ्यारण्य राजस्थान 1985
19 खजुराहो के मंदिर एवं स्मारक मध्य प्रदेश 1986
20 महाबोधी मंदिर, बोधगया, बिहार 2002
21 मानस राष्ट्रीय अभ्यारण्य असम 1985
22 नंदादेवी राष्ट्रीय अभ्यारण्य उत्तराखंड 1998, 2005
23 कुतुब मीनार दिल्ली 1993
24 भीमबटेका मध्य प्रदेश 2003
25 लाल किला दिल्ली 2007
 26  सुंदरवन राष्ट्रीय अभ्यारण्य पश्चिम बंगाल 1987
27 जंतर मन्तर, जयपुर राजस्थान 2010
28 आमेर का किला राजस्थान 2013
29 गागरौन किला, झालावाड़ राजस्थान 2013
30 चित्तौड़गढ़ किला राजस्थान 2013
31 कुंभलगढ़ किला राजस्थान 2013
32 रणथंभोर दुर्ग राजस्थान 2013
33 जैसलमेर किला राजस्थान 2013
34 पश्‍चिमी घाट, कर्नाटक, केरल, महाराष्‍ट्र, तमिलनाडु 4 States 2012
35 भारतीय पर्वतीय रेल, दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल 1999
36 भारतीय पर्वतीय रेल, नीलगिरि तमिलनाडु 2005
37 भारतीय पर्वतीय रेल कालका-शिमला हिमाचल प्रदेश 2008
38 रानी की वाव पाटण गुजरात गुजरात 2014
39 ग्रेट हिमालयन राष्ट्रीय उद्यान, कुल्ल हिमाचल प्रदेश NA
40 चण्डीगढ़ कैपिटल कॉम्प्लैक्स चण्डीगढ़ 2016

भारत के स्मारक और स्थान

मुगल आक्रंताओ ने हमारे न जाने कितनी ऐतिहासिक इमारतों और स्मारकों को नष्ट करके वह पर सिर्फ इस्लाम की उन्नति को दर्शाने वाली इमारते और स्मारक बना दी, इनमे से ढ़ाई दिन का झोपड़ा, क़ुतुब मीनार, यहाँ तक की कई इतिहास कार तो ताज महल के लिए भी कहते है की ताजमहल की ईमारत के पीछे एक हिन्दू मंदिर था जो की भगवान शिव को समर्पित था, चुकी इतिहास लेखन का ज्यादातर समय मुगल काल में बीच ही रहा है इसलिए सभी चाटुकार इतिहासकारो ने मुगलो के महिमा मंडन और हिन्दू धार्मिक स्थलों, इमारतों और स्मारकों के खण्डन को चुप चाप दबा दिया और हमारी पीढ़ी को ये मानने पर विवश कर दिया की हिन्दुओ के जो स्थल, स्मारक या इमारते नही है वो नहीं थी.

भारतीय स्मारक

हम उन भवनों एवं प्रतीक चिन्हो को ऐतिहासिक इमारते कहते है जिनक निर्माण किसी विशेष प्रयोजन के लिए किया गया हो अथवा जिसमे कोई बहुत बड़ी ऐतिहासिक महत्त्व की कोई घटना घटी हो, जैसे किसी भवन का निर्माण किसी विशेष युद्ध के पश्चात करवाया गया हो या जिसके कारन कोई बाद युद्ध हुआ हो, अथवा जिसका निर्माण किसी विशेष परिस्थितिओ या प्रयोजन के लिए हुआ हो, और जो वर्षो वर्ष बीत जाते के बाद भी उसी भव्यता और विशिष्टता के साथ खड़ा हो।

हम यहाँ पर पुरे भारत देश में स्थित एवं निर्माणित ऐतिहासिक महत्त्व की इमारतों एवं स्मारकों का वर्णन करेंगे, उनके निमित्त कुछ ऐतिहासिक तथ्य सारणी के माध्यम से बतायेगे तथा अन्य जानकारी भी हिंदी और अंगेजी दोनों भाषाओ में देंगे।

अगर पुरातत्व विभाग निष्पक्ष रूप से हर मस्जिद की जाँच करे तो कही न कही उसके गर्भ में हिन्दू स्मारकों और इमारतों का मालवा जरूर निकलेगा, पर अभी भी देश में कुछ भारतीय ऐतिहासिक स्मारक है जो हिन्दुस्थान की में संस्कृति की रक्षा कर रहा है।

सर्वे ऑफ़ इंडिया की स्थापना

जब भारत में अंग्रेजों का शासन था तो उन्होंने सोचा था की वो यहाँ हमेशा राज करते रहेंगे और जो भी यहाँ के स्थापत्य, और कला के केंद्र या ऐतिहासिक इमारते है उनको धीरे धीरे अपने नाम पर कर लेंगे की ये हमने बनवाये है, इसी को पूरा करने के उद्देस्य से उन्होंने १७६७ में देहरादून में सर्वे ऑफ़ इंडिया की स्थापना की जिसे भारत का पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग भी कहा जाता है, इसका काम सिर्फ ये था की कौन सी ईमारत कितनी पुरानी है, इसकी क्या खासियत है, कब बनी, किसने बनवायी, क्यों बनवायी, लेकिन स्वतंत्र के बाद इसी संस्था ने बहुत सी इमारतों को खोजै और उनको नया जीवन दिया।

Smarak in India

India that is Bharat, having a long list of Monuments i.e smarak a few are belongs to Hindu Kings that includes Rajput kings, Maratha Kings, Bahmani, Chaul, Chaluky, Maurya, Gupt Kings, they all were made with a wonderful architecture and a few are get place in UNESCO world heritage list, here you find a big list of thos Smark or Monuments, in our this article you can know kaun sa smarak sabse pahle bana, bharat ke smarak aur sthan and about bharat ki aitihasik imarat, we collected all the data from some trusted sources.

Sasu Vahu ni Vav in Gujarat

Sasu Vahu ni Vav is one of the famous Monument in Gujarat, is located in Lavana in Mahisagar District of Gujarat, There are two Vavs one is Sasu Vav means Mother in Law and another is vahu means daughter in law and both built due to demand of then king’s mother and wife, the duration is around 14th to 15th Century, as of now these vavs are taking care by Gujarat’s Kaleshwari Group of Monuments the coordinates of the Sasu Vahu ni Vav are 23°19′16″N 73°34′55″E and 23°19′18″N 73°34′55″E.

Facts of Sasu Vahu ni Vav

NameSasu Vahu ni Vav
CityLavana
DistrictMahisagar
StateGujarat
latlong23°19′16″N 73°34′55″E and 23°19′18″N 73°34′55″E
care takerKaleshwari Group of Monuments
Came in Existance14th to 15th Century

Sasu Vahu ni Vav in Hindi

सास बहु की बाव का कोई ऐतिहासिक साक्ष्य नहीं है की किसने बनवाया, क्यों बनवाया, कब बनवाया, फिर भी इसको भगवान विष्णु के बलराम अवतार के द्वारा निर्मित बताया जाता है, जो की उन्होंने अपनी माता जी और पत्नी के लिए बनवायी थी, कुछ अन्य लोगो की मान्यता है की इसे शायद १४वी और १५वी शताब्दी के मध्य बनाया गया होगा, वर्तमान में यह कालेस्वरी ग्रुप संरक्षण में है और भारत के राज्य गुजरात के महिसागर जिले लवाना नगर में है।

Fatehpur Sikri is Famous for What

Fatehpur Sikri is a famous city is located in Agra District of Indian state Uttar Pradesh. The town was founded as the capital of Mughal Empire in 1571 by Akbar, serving this role from 1571 to 1585, Akbar completely abandoned it in 1610. Know where is Fatehpur Sikri

There are so many places, due to that Fatehpur Sikri is famous know facts and history of Fatehpur Sikri, they are as follows:

Buland Darwaza: Buland Darwaza at Fatehpur Sikri is 55 metres (180 ft) high, from the ground, gradually making a transition to a human scale in the inside. The gate was added around five years after the completion of the mosque c. 1576-1577 as a victory arch, to commemorate Akbar’s successful Gujarat campaign.
Jama Masjid: It is a Jama Mosque meaning the congregational mosque and was perhaps one of the first buildings to be constructed in the complex, as its epigraph gives AH 979 (A.D. 1571-72) as the date of its completion, with a massive entrance to the courtyard, the Buland-Darwaza added some five years later.
Tomb of Salim Chishti: A white marble encased tomb of the Sufi saint, Salim Chisti (1478–1572), within the Jama Masjid’s sahn, courtyard.
Diwan-i-Aam: Diwan-i-Aam or Hall of Public Audience, is a building typology found in many cities where the ruler meets the general public.
Diwan-i-Khas: Diwan-i-Khas or Hall of Private Audience, is a plain square building with four chhatris on the roof. However it is famous for its central pillar, It is here that Akbar had representatives of different religions discuss their faiths and gave private audience.
Ibadat Khana: (House of Worship) was a meeting house built in 1575 CE by the Mughal Emperor Akbar, where the foundations of a new Syncretistic faith, Din-e-Ilahi were laid by Akbar.
Anup Talao: Anup Talao was built by Raja Anup Singh Sikarwar A ornamental pool with a central platform and four bridges leading up to it.
Hujra-i-Anup Talao: Said to be the residence of Akbar’s Muslim wife, although this is disputed due to its small size.
Mariam-uz-Zamani’s Palace: The building of Akbar’s Rajput wives, including Mariam-uz-Zamani, shows Gujarati influence and is built around a courtyard, with special care being taken to ensure privacy.
Naubat Khana: Known as Naqqar Khana meaning a drum house, where musician used drums to announce the arrival of the Emperor. It is situated ahead of the Hathi Pol Gate or the Elephant Gate, the south entrance to the complex, suggesting that it was the imperial entrance.
Pachisi Court: A square marked out as a large board game, the precursor to modern day Ludo game where people served as the playing pieces.
Panch Mahal: A five-storied palatial structure, with the tiers gradually diminishing in size, till the final one, which is a single large-domed chhatri. Originally pierced stone screens faced the facade and probably sub-divided the interior as well, suggesting it was built for the ladies of the court. The floors are supported by intricately carved columns on each level, totalling to 176 columns in all.
Birbal’s House: The house of Akbar’s favourite minister, who was a Hindu. Notable features of the building are the horizontal sloping sunshades or chajjas and the brackets which support them.
Hiran Minar: The Hiran Minar, or Elephant Tower, is a circular tower covered with stone projections in the form of elephant tusks. Traditionally it was thought to have been erected as a memorial to the Emperor Akbar’s favourite elephant. However, it was probably a used as a starting point for subsequent mileposts.
Other buildings: aksal (mint), Daftar Khana (Records Office), Karkhana (royal workshop), Khazana (Treasury), Hammam (Turkic Baths), Darogha’s Quarters, stables, Caravan sarai, Hakim’s quarters, Khwabgah (House of Dreams) Akbar’s residence, Panch Mahal, a five-storey palace, Diwan-i-Khas(Hall of Private Audience), Ankh Michauli and the Astrologer’s Seat, in the south-west corner of the Pachisi Court etc.